दिल्ली, 26 सितंबर
पूर्वजों को समर्पित पितृपक्ष आज से शुरू हो चुका है। धार्मिक मान्यता है कि 16 दिनों तक पितरों का पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार को पितृ दोष से भी मुक्ति मिसती है।इस साल 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर पितृपक्ष का समापन होगा।
श्राद्ध के क्या नियम हैं ?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दोपहर के समय पिंडदान करना औऱ तर्पण करना सबसे शुभ माना जाता है।पितृपक्ष के इन 16 दिनों में कुछ नियमों को बहुत सख्ती से माना जाता है। इन दिनों लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इन दिनों में नए कपड़े, कोई कीमती सामान नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा कोई कार्य न करें जिससे पितृपक्ष नाराज हो जाए।
तर्पण करते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख कर पितरों को तर्पण करे।पितरों के लिए बनाए खाने में से गाय, कुत्ते, कौवे और चींटी के लिए खाना जरूर निकालें। धार्मिक मान्यता है कि इनके जरिए भोजन पितरों तक पहुंच जाता है।
मृत्यु तिथि याद न हो तो क्या करें?
पितृपक्ष में श्राद्ध पूर्वज की मृत्यु तिथि के अनुसार किया जाता है। अगर किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु की तिथि पता नहीं तो वह 10 अक्तूबर को पड़ने वाली सर्वपितृ अमावस्या को अपने सभी पितरों का श्राद्ध औऱ तर्पण कर सकता है। इसे सबसे बड़ा श्राद्ध माना जाता है।
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