Janmashtami 2026: कंस के अत्याचार से कृष्ण के जन्म तक, जानिए जन्माष्टमी की पूरी पौराणिक कथा

दिल्ली, 4 सितंबर पूरे देशभर में आज जन्माष्टमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।यह हिंदू धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक…

जन्माष्टमी

दिल्ली, 4 सितंबर

पूरे देशभर में आज जन्माष्टमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।यह हिंदू धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी के दिन देशभर के मंदिरों को सजाया जाता है।भक्त व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्म मनाते हैं।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापुर युग में मथुरा के राजा उग्रसेन का पुत्र कंस बहुत अत्याचारी था। वह अपने पिता को मारकर गद्दी पर बैठना चाहता था। कंस की देवकी जिससे वह बहुत प्रेम करता था, उसका विवाह यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुआ।जब कंस दोनों को घर छोड़ने जा रहा थी, तब रास्ते में आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस के वध का कारण बनेगी।

यह सुनकर कंस को बहुत गुस्सा आया और उसने वसुदेव-देवकी को बंदी बना लिया।देवकी ने कंस से वादा किया जो भी बच्चा होगा, वह उसे सौंप देंगी। इसके बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया।

देवकी और वसुदेव की छह संतानों की कंस ने हत्या कर दी थी। सातवीं संतान के रूप में शेषनाग के अवतार माने जाने वाले बलराम का गर्भ योगमाया की शक्ति से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हो गया।

इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को देवकी ने भगवान श्रीकृष्ण को जन्म दिया।उसी समय कारागर के सभी पहरेदार सो गए और जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए। वसुदेव नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर गोकुल की ओर निकल पड़े।

उस रात भारी बारिश के चलते यमुना नदी उफान पर थी। वसुदेव गोकुल पहुंचे, जहां नंद की पत्नी यशोदा ने भी एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव ने कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस मथुरा के कारागार पहुंच गए।

जब कंस को देवकी की संतान की जानकारी मिली तो वह कारागर पहुंचा। जब उसने कन्या को मारने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से निकलकर आकाश में चली गई। पौराणिक कथा के अनुसार उसने कंस को चेतावनी दी कि उसका संहार करने वाला जन्म ले चुका है और गोकुल पहुंच चुका है।

इसके बाद कंस को मारने के लिए बहुत राक्षसों को भेजा, लेकिन कोई सफल नहीं हो सका। श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर मथुरा के लोगों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।

5 सितंबर को दही हांडी उत्सव

जन्माष्टमी के अगले दिन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही हांडी उत्सव मनाया जाता है। इस साल दही-हांड़ी का उत्सव 5 सितंबर को मनाया जाएगा।

दही हांडी की परंपरा भगवान कृष्ण की माखन चोरी की बाल लीला से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर ऊंचाई पर टंगी मटकी को मानव पिरामिड बनाकर फोड़ते और उसमें रखा माखन-दही खाया करते थे।

   जन्माष्टमी की शुभकामनाएं-

आओ कान्हा, आओ कान्हा,
फिर से मुरली बजाओ कान्हा।
मन के सारे दुख हर लो,
प्रेम का दीप जलाओ कान्हा।

जय श्रीकृष्ण

नंद के घर आनंद छाया,
यशोदा मैया ने लल्ला पाया
आपके घर भी खुशियां आएं अपार,
जन्माष्टमी का हो मंगलमय त्योहार

 

राधा की चाहत, राधा का प्यार,
राधा की शान, कृष्ण व्यवहार।
गोकुल में जो करे सदा निवास,
मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्योहार।

 

नटखट कान्हा मुस्कुराएं,
जीवन में नई खुशियां लाएं
प्रेम, सुख और शांति से भर दें संसार,
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं अपा

 

मुरली की धुन में सजे हर अरमान,
कान्हा करें खुशियों से भरपूर आपका जहान
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

 

माखन चुराने वाला नटखट नंदलाल,
हर ले आपके जीवन के सारे मलाल
शुभ हो जन्माष्टमी का त्योहार

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