पंजाब ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सुधारों को दी नई गति

चंडीगढ़; 13 अगस्त 2026: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन और मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में…

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चंडीगढ़; 13 अगस्त 2026: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन और मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) को सशक्त बनाने की प्रक्रिया अधीन है।

भगवंत मान सरकार का यह कदम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विनियमन के लिए एक व्यापक ढाँचा सुनिश्चित करेगा, पूरे पंजाब में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करेगा और राज्य के प्रमुख नशा-विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ की गति को बनाए रखने में मदद करेगा।

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण राज्य की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जो मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के कार्यान्वयन की निगरानी और उसे नियंत्रित करती है। यह मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के पंजीकरण और निगरानी, गुणवत्ता एवं सेवा मानदंड निर्धारित करने, निर्धारित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का पंजीकरण करने तथा मानसिक स्वास्थ्य नीति से संबंधित मामलों में सरकार को सलाह देने का कार्य करती है। साथ ही, यह यह भी सुनिश्चित करेगी कि अधिनियम के तहत दिए गए अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

इस व्यवस्था में जिलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड (एमएचआरबी) भी शामिल हैं। प्रत्येक बोर्ड की अगुवाई जिला न्यायाधीश या योग्य न्यायिक अधिकारी द्वारा की जाती है। ये बोर्ड प्रवेश और उपचार संबंधी निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा, शिकायतों और अधिकारों के उल्लंघन संबंधी सुनवाई, अग्रिम निर्देशों और नामित प्रतिनिधियों की समीक्षा तथा आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण भी करते हैं।

यह प्राधिकरण विभिन्न विभागों के प्रशासकों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाता है। अधिनियम के अनुसार, इसकी अगुवाई स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा की जाती है। चेयरपर्सन के अलावा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और समाज कल्याण विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होते हैं। इस समय प्रशासनिक और सामुदायिक दोनों स्तरों पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए राज्य ने प्राधिकरण में गैर-सरकारी सदस्यों के नाम नामित किए हैं। राज्य अब प्राधिकरण में मनोचिकित्सकों, मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रतिनिधियों, देखभाल करने वालों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य प्रमुख हितधारकों को भी शामिल कर रहा है। इससे मानसिक स्वास्थ्य और नशों के विरुद्ध लड़ाई को लोक लहर बनाने के सरकार के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, परामर्श संबंधी पहलों और समुदाय-आधारित उपायों के माध्यम से जिला स्तर पर अपने मानसिक स्वास्थ्य ढाँचे का विस्तार कर रहा है। राज्य के प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ के शुरू होने के बाद मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में तेजी आई है। एसएमएचए इन सभी प्रयासों को एक मजबूत प्रबंधन के अधीन लाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि रोगियों को निर्धारित राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार उपचार और देखभाल मिले।

इस संबंध में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “एसएमएचए में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम में वर्णित अनुसार समुदाय के लोगों की भागीदारी से मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों की आत्मनिर्भरता, सम्मान और कानूनी अधिकारों की और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसमें नशे की लत से जूझ रहे लोग भी शामिल हैं।”

उन्होंने कहा, “राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के पुनर्गठन से पंजाब एक ऐसी रोगी-केंद्रित और अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली तैयार करने को प्राथमिकता दे रहा है, जो अधिक जवाबदेह हो और राज्य भर में मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा-मुक्ति सेवाओं की बढ़ती माँग को पूरा करने में सक्षम हो।”

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