भिवानी, 10 अगस्त
भिवानी में अवैध नशे की दवाइयों और गर्भपात की दवाइयों की बिक्री के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद अब एक नया मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक परिसर में छापेमारी कर बड़ी मात्रा में दवाइयां बरामद की थीं। परिसर को सील कर पुलिस की निगरानी में सौंपा गया था। लेकिन कुछ दिन बाद आरोप है कि पीछे की दीवार तोड़कर वहां से दवाइयां निकाल ली गईं। मामले को लेकर भिवानी के सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर सिंह शांडिल्य ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखने की बात कही है।
सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर सिंह शांडिल्य के मुताबिक, स्टेट टास्क फोर्स के दिशा-निर्देशों के तहत जिले के मेडिकल स्टोर और प्राइवेट क्लीनिकों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसका उद्देश्य अवैध रूप से नशे की दवाइयों और गर्भपात से जुड़ी दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाना है।
CMO ने बताया कि 4 तारीख को मिली गुप्त सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की थी। मौके पर तीन दुकानें मिली। इनमें से एक दुकान में क्लीनिक चल रहा था और वहां बड़ी मात्रा में दवाइयां मिलीं, जबकि दो स्टोर लॉक थे। स्वास्थ्य विभाग ने दवाइयों की इन्वेंट्री तैयार की और बंद कमरों को सील कर पुलिस को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी।
लेकिन कुछ दिन बाद पीछे की दीवार तोड़कर सील परिसर से दवाइयां निकाल लिए जाने की बात सामने आई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी वीडियोग्राफी कराते हुए दोबारा FIR दर्ज कराने की बात कही गई है। CMO ने कहा कि सील किए गए परिसर की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी पुलिस की थी और इस मामले में विभाग को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
CMO ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान संबंधित व्यक्ति के गांव में घूमने की जानकारी टीम को मिली थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस से उसे पकड़कर लाने को कहा, लेकिन उनके मुताबिक पुलिस उसे लेकर नहीं आई।
CMO ने स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों से भी अवैध दवाइयों के खिलाफ सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि अवैध नशे और गर्भपात की दवाइयों की बिक्री केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज को मिलकर इसके खिलाफ खड़ा होना होगा।
सिविल सर्जन के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग पिछले करीब छह महीने से लगातार अभियान चला रहा है। गुप्त सूचनाओं और डिकॉय ऑपरेशन के आधार पर टीमों द्वारा फिजिकल रेड की जाती है और अवैध दवाइयां मिलने पर उन्हें कब्जे में लेकर FIR दर्ज कराई जाती है।
CMO ने नशे की अवैध दवाइयों को युवाओं और समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी लोगों से एकजुट होकर इसके खिलाफ काम करने की अपील की। साथ ही उन्होंने पूरे मामले में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजने की बात कही है।
अब देखना होगा कि सील परिसर से दवाइयां निकाले जाने के मामले में जांच के बाद किसकी जिम्मेदारी तय होती है और स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।
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