दिल्ली, 19 जुलाई
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होनें कहा कि उनका सरकारी अस्पताल पर से भरोसा उठ गया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है। उन्होने कहा कि सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाए।
गीतांजलि का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें बताया था कि सोनम वांगचुक का पोटेशियम स्तर 2.9 तक गिर गया है, जिसे डॉक्टरों ने गंभीर और जानलेवा स्थिति बताया। हालांकि, अस्पताल के सार्वजनिक हेल्थ बुलेटिन में केवल पोटेशियम स्तर कम होने की बात कही गई और वास्तविक आंकड़ा साझा नहीं किया गया। उनका दावा है कि एक स्वतंत्र लैब की जांच में पोटेशियम स्तर 3.5 पाया गया, जो सामान्य सीमा में है।
गीतांजलि के मुताबिक, वार्ड के बाहर करीब 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं। अस्पताल परिसर में लगभग 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे उनकी आवाजाही सीमित हो गई है। उन्होंने इसे इलाज नहीं बल्कि “कथित अवैध हिरासत” करार दिया। गीतांजलि ने कहा कि यदि सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी। उन्होंने दिल्ली अदालत से जल्द सुनवाई कर निजी अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति देने की अपील की है।
इस बीच, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की ओर से उनकी पत्नी के माध्यम से एक हस्तलिखित संदेश भी जारी किया गया है। इसमें उन्होंने 20 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम को “आजादी का दूसरा आंदोलन” बताते हुए लोगों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है।
संदेश में उन्होंने लिखा, “आजादी का दूसरा आंदोलन, जय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत।” साथ ही अंग्रेजी में Freedom from Injustice और Freedom from Fear का उल्लेख करते हुए पेपर लीक जैसे अन्याय और अपनी कथित अवैध हिरासत से मुक्ति की बात कही है।
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन में बताया कि उनके सभी वाइटल पैरामीटर फिलहाल स्थिर हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।
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