शिमला 5 जुलाई
हिमाचल के बागवान इस बार बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से बुरी तरह परेशान हैं। सेब सहित स्टोन फ्रूट की पैदावार कम होने से बागवानों की कमर टूट गई है। बागवानों का कहना है कि मौसम की बेरुखी के चलते फसल बेहद कम हुई है, दवाइयां और उपकरण महंगे हो गए हैं, खर्चा ज्यादा और आय ना के बराबर रह गई है। परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।
इस बार सेब का उत्पादन 6.99 लाख मीट्रिक टन से घटकर करीब 4.36 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। बागवानों ने कहा कि इस बार सेब सहित स्टोन फ्रूट की पैदावार बहुत कम हुई है। हर चीज महंगी हो गई है – दवाइयां, मशीनी उपकरण, सबका खर्चा बहुत ज्यादा आ रहा है। उत्पादन कम हो गया है ।बागवानों ने सरकार से मांग की कि सिंचाई के साधन हर बागवान तक पहुंचाए जाएं और फसल बीमा योजना की जानकारी हर बागवान तक पहुंचे ताकि थोड़ा बहुत गुजारा निकल सके।
वहीं बागवानी विभाग हिमाचल प्रदेश के निदेशक सतीश कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को फल राज्य के रूप में जाना जाता है और 2.37 लाख हेक्टेयर भूमि पर फलों की खेती की जाती है। जिसमें एप्पल के अंतर्गत करीब 49% एरिया आता है, जो 1,16,000 हेक्टेयर है। 2024-25 में सेब की पैदावार 6 लाख 99 हजार मीट्रिक टन थी और सेब की इकोनॉमी 5000 करोड़ की है। साढ़े चार लाख बागवान सेब से जुड़े हैं। इस बार एक्सपेक्टेड प्रोडक्शन कम रहेगी। विभाग ने अनुमान लगाया है कि उत्पादन लगभग 4,36,000 मीट्रिक टन ही रह सकता है। स्टोन फ्रूट की पैदावार भी पिछले वर्ष की तुलना में कम है। स्टोन फ्रूट में रेट तो अच्छे हैं, लेकिन प्रोडक्शन की कमी है।
ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से टेंपरेचर बढ़ रहा है। लोगों को सलाह है कि विभाग द्वारा बताई गई हाई डेंसिटी और हाई क्वालिटी वैरायटी के पौधे लगाएं। साथ ही बागवान फसल बीमा जरूर कराएं।
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