चंडीगढ़ के स. इंदरजीत सिंह सिद्धू को 23 जून को राष्ट्रपति से मिलेगा पद्म श्री

चंडीगढ़, 20 जून 2026: चंडीगढ़ के निवासी श्री स. इंदरजीत सिंह सिद्धू को 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एक विशेष अलंकरण…

चंडीगढ़, 20 जून 2026: चंडीगढ़ के निवासी श्री स. इंदरजीत सिंह सिद्धू को 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एक विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

स. इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब पुलिस से उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के रूप में सेवानिवृत्त एक प्रेरणादायक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें व्यापक रूप से ‘झाड़ू योद्धा’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने स्वच्छता के प्रति अपनी मौन लेकिन शक्तिशाली प्रतिबद्धता के लिए राष्ट्रव्यापी प्रशंसा हासिल की है।

6 जून, 1938 को पंजाब के संगरूर जिले के गागरपुर गांव में जन्मे, श्री सिद्धू ने अनुशासन, सत्यनिष्ठा और अटूट सार्वजनिक सेवा से युक्त जीवन व्यतीत किया। संगरूर के गवर्नमेंट रणबीर कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स में स्नातक की डिग्री के बाद उन्होंने महिंद्रा कॉलेज, पटियाला से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की। अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान, उन्होंने मुक्केबाजी में शोहरत हासिल की, प्रतिष्ठित कॉलेज कलर अवार्ड हासिल किया और पंजाब के सभी विश्वविद्यालयों के बीच चैंपियन के रूप में दो बार स्पोर्ट्स में रोल ऑफ ऑनर में जगह हासिल की। एनसीसी शिविरों के दौरान सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति उनका झुकाव स्पष्ट था, जहां उन्हें स्वैच्छिक समाज सेवा और स्वच्छता पहल के लिए जाना जाता था।

श्री सिद्धू वर्ष 1963 में पंजाब पुलिस में एक निरीक्षक के रूप में शामिल हुए। वर्ष 1981 में, उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नत किया गया। अपने विशिष्ट करियर के दौरान, उन्होंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, नई दिल्ली और कोलकाता में अपनी सेवाएं प्रदान की। उन्होंने 1971 के भारत-पाक संघर्ष के दौरान सांबा सेक्टर में भी सेवा प्रदान की। उनके अनुकरणीय रिकॉर्ड को देखते हुए, उन्हें 1991 में सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। वह 1996 में चंडीगढ़ से पंजाब के उप महानिरीक्षक (आसूचना) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

सेवानिवृत्ति के बाद, श्री सिद्धू ने नागरिक जिम्मेदारी और स्वच्छता में विश्वास करते हुए चंडीगढ़ में सार्वजनिक स्थानों के अनुरक्षण के लिए खुद को समर्पित कर दिया। वह नियमित रूप से सुबह टहलते थे और पार्कों और रास्तों की बिगड़ती स्थिति से परेशान थे। उन्होंने अपनी दैनिक सैर के दौरान खुद से कूड़ा साफ करना शुरू कर दिया।

लगभग तीन दशकों से, श्री सिद्धू ने स्वेच्छा से पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई की है, बेहतर स्वच्छता के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा, सफाई कर्मचारियों को प्रेरित किया और दूसरों के लिए उदाहरण पेश किया। दूसरों की उदासीनता और निराशा के बावजूद, वह दृढ़ रहे। अपनी अंतः चेतना से शुरू हुआ एक व्यक्तिगत कार्य जीवन भर का मिशन बन गया। राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन के शुभारंभ से बहुत पहले, वह नागरिकों के नेतृत्व में स्वच्छता और सिविक जिम्मेदारी की भावना को मूर्त रूप देते हुए सतत् व्यक्तिगत कार्रवाई के जरिए इसके आदर्शों का अभ्यास और प्रचार कर रहे थे। बढ़ती उम्र में भी, शिकायत पर कार्रवाई को प्राथमिकता देते हुए, वह चंडीगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और नागरिक गौरव को बहाल करने और संरक्षित करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। वर्दी में और उससे परे दोनों में उनका जीवन विनम्रता, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की मिसाल है।

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