मानसा: मानसा की बेटी सिमरनजीत कौर ने सपने तो बहुत देखे, लेकिन उसका सपना है कि पूरा होने का नाम नहीं ले रहा। सातवीं में पढ़ने वाली सिमरनजीत चाहती है दोस्तों के साथ खेलना। वो चाहती है कि दूसरे बच्चों के साथ दूर तक दौड़े। लेकिन क्या आप जानते है ये सब उसके दिल में ही चलता है जो आंसू बनकर आंखों के रास्ते निकलता रहता है। आज हम आपको बताएंगे एक बेटी के अंतहीन दर्द की दास्तान।
बिस्तर पर लेटी इस बेटी की आंखें ताक रही है उस उम्मीद का रास्ता जो शायद नुक्कड़ पर खड़ी है। सिमरनजीत के मजदूर परिवार ने पूरी कोशिश की लेकिन उसके जख्मों के माकूल मरहम नहीं मिल सका। एक हादसे ने सिमरनजीत को स्कूल की बेंच से सीधे घर के बिस्तर पर पहुंचा दिया। दूसरों के घर में रंग-रोगन करके परिवार को पालने वाले सिमरनजीत के पिता भी लाचार हैं, क्योंकि तमाम कोशिशों के बावजूद बेटी की जिंदगी रंगीन नहीं बना सके।
मानसा: सिमरनजीत को आपकी मदद चाहिए
मानसा: मानसा की बेटी सिमरनजीत कौर ने सपने तो बहुत देखे, लेकिन उसका सपना है कि पूरा होने का नाम नहीं ले रहा। सातवीं में पढ़ने…
