न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पठानकोट को देश के स्वच्छता रैंकिंग में 188वां स्थान मिला। खुशी की बात यह है कि 434 शहरों में यह स्थान मिला है। शर्म यह कि पठानकोट नगर निगम को इससे फर्क नहीं पड़ता है। लिहाजा चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, इस लिहाज से सड़कों की परिभाषा भी बदल गई है। दरअसल यह हकीकत की बानगी भर है डिजिटल इंडिया से जोड़कर स्वच्छ भारत बनाने की। क्योंकि सफाई के लिए स्वच्छता एप भी लांच किया गया, लेकिन गंदगी है कि हटती नहीं। ये स्थिति है पठानकोट के हल्का सुजानपुर की। रोज-रोज की शिकायतों से ऊब चुकी जनता नगर काउंसिल की बैठक में ही पहुंच गई। साथ ही नगर काउंसिल के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्याओं की फेहरिस्त थमा दी।
आरोप लगाया कि सुजानपुर में विकास के नाम पर राजनीति की जाती है। नगर काउंसिल ने 104 करोड़ रूपये का फंड विकास कार्यों के लिए जारी किया है। लेकिन प्रदेश सरकार कह रही है कि खजाना खाली है तो इस स्थिति में विकास कार्यों के लिए कहां से पैसा आएगा। मोहल्ले के लोगों की मानें तो इस हल्के से भाजपा के विधायक हैं, जबकि नगर काउंसिल का अध्यक्ष भी भाजपा के नजदीकी हैं। जबकि प्रदेश में सरकार कांग्रेस की है। साफ है उन्हें मूर्ख बनाया जा रहा है। मतलब विकास ना हुआ तो कहा जाएगा कि प्रदेश में दूसरी पार्टी की सरकार के कारण विकास कार्य नहीं कराया जा सका। जबकि काउंसिल स्तर पर भी कुछ नहीं किया जा रहा है।
जब इस मामले पर नगर काउंसिल के पूर्व प्रधान राजकुमार गुप्ता से बात की गई तो उनके जबाव से लगा कि विकास के नाम पर अनदेखी की जा रही है। जबकि नगर काउंसिल के पदाधिकारी भी बस गोलमोल जबाव देने में लगे रहे।दरअसल ये हकीकत है स्वच्छ भारत अभियान की। भले ही तमाम माध्यमों से कहा जाए कि चारों तरफ सफाई की जा रही है। गंदगी का नामोंनिशान देखने को नहीं मिलेगा। लेकिन आपको सच्चाई पता करनी हो तो एक बार सुजानपुर आ जाएं, आपको नारों और उसका असल साफ-सुथरा मकसद सही से नजर आ जाएगा।


