धोखेबाज सिस्टम की शिकार करगिल शहीद की मां

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : 26 जुलाई की तारीख आपको याद ही होगी, हाल ही हमने 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस मनाया। हमने और हमारे…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : 26 जुलाई की तारीख आपको याद ही होगी, हाल ही हमने 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस मनाया। हमने और हमारे नेताओं ने कसमें खाई करगिल युद्ध के शहीदों की शहादत को हमेशा याद रखने की। लेकिन क्या हम इन कसमों को सही में याद रखते हैं, अगर आपका जबाव हां है तो एक बार मानसा के कुसला गांव में आईए। यहां एक मां जंगीर कौर है और उसके टूटे घर की दीवार पर टंगे शहीद बेटे निर्मल सिंह की तस्वीर। 15 सिख इन्फैन्टरी के नायक निर्मल सिंह करगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गया था। निर्मल की मां आज भी उसे याद करके फफक-फफककर रो पड़ती हैं। वो करे भी क्या करे ताउम्र बेटे खोने का दर्द उनकी आंखों से आंसू बनकर बहता रहेगा, आखिर वो तो ठहरी देश के एक सच्चे सिपाही की मां।

निर्मल की मौत के बाद राजनीति हुई और इतनी कि देशभक्ति पीछे छूट गई। उम्मीद बंधाई गई कि हर मदद की जाएगी, निर्मल की कमी पूरी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन राजनीति यहां भी गच्चा दे गई और आज जंगीर मनरेगा मजदूर बनकर 80 साल की उम्र में जिंदगी को संवारने की कोशिश कर रही हैं। ये हकीकत है उस सरकार और उस सिस्टम की जो हर साल 26 जुलाई को शहादत के सम्मान की बड़ी-बड़ी कसमें खाता है। गर्व से कहता है कि शहीदों के परिवारों को हर मदद दी जाएगी, लेकिन होता कुछ भी नहीं। जंगीर का बेटा शहीद हुआ तो बहू परमजीत कौर भी घर छोड़कर चली गई। निर्मल की मां जिस घर में रहती है उसे देखकर आपकी आंखें भले ही नम ना हो, आपका दिल जरूर पसीज जाएगा।

जंगीर कौर जिस हालत और जिस घर में रहती है उसकी खस्ता हालत देखकर आपको सिस्टम पर तरस आ जाएगा। तरस इसलिए कि हमारा सिस्टम हर गुजरते पल के साथ धोखेबाज होता जा रहा है। घर की छत गिर चुकी है और सिर्फ एक टूटा कमरा बचा हुआ है। उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंच गई यह मां सरकार से कुछ नहीं चाहती है। उसे पता है कि अब बाकी बची जिंदगी उसे बेटे की याद में गुजारनी होगी। और रही बात पेट की आग बुझाने की तो उसके पास मनरेगा में मजदूरी है ही। ये हमारे सिस्टम का वो काला सच है जो अक्सर झूठे वादों की सच में दिखता नहीं है। शायद हमारा सिस्टम और हमारी सरकार ऐसे ही काम करती है जो सिर्फ वादे करती है और उसे पूरा होने की आस में बैठे लोगों को तन्हा छोड़कर आगे बढ़ जाती है दूसरा वादा करने।

 

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