तरनतारन: ये सिस्टम नहीं बल्कि भ्रष्ट तंत्र है। जहां पर सब कुछ होता है, अब इन्होंने पीछे से पैसे पकड़ लिए तो क्या हो गया। ये भी उसी तंत्र के सक्रिय सदस्य हैं, जिस तंत्र में सब कुछ बिकाउ है। भ्रष्ट है। और इनके सदस्य सड़कों पर 100-200 रुपये में बिकने को तैयार होते हैं।
यकीन मानिए आप कई बार ऐसे ट्रैफिक पुलिस से मिले होंगे हो सकता है आप भी ऐसे ही पीछे से पैसे पकड़ाकर निकल गए होंगे। इसके लिए दोषी आप भी हैं। क्योंकि आपको चालान नहीं देना आता लेकिन घूस देकर निकलने में महानता समझते हैं। खैर। ये तस्वीरें भ्रष्ट तंत्र की है जहां 100-200 में लोग बिकने को तैयार है।
तरनतारन के पट्टी में दो पहिया वाहनों की चेंकिंग चल रही थी। नीले और सफेद लिबास में ये वो भीड़ है जिसके कंधों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है लेकिन ये उसी तंत्र का हिस्सा हैं। और ये भीड़ उसी पैसे की उगाही के लिए है, जिसमें सबकी हिस्सेदारी लगभग तय होती है। क्योंकि ये भ्रष्ट तंत्र है और यहां 100-200 में लोग बिकने को तैयार हैं
ये वीडियो किसी एक टैफ्रिक कर्मचारी अधिकारी के लिए काला धब्बा नहीं बल्कि पूरे पुलिसिया तंत्र पर कालिख है । खैर फर्क नहीं पड़ता, अब तरनतारन के पट्टी में नहीं तो मोहाली के फ्लाइओवर के नीचे, लुधियाना के चौराहे पर, अमृतसर के ट्रैफिक में वहीं जेब मोटी की जाएगी। क्योंकि ये भ्रष्ट तंत्र बदलने वाला नहीं। हां हो सकता है ये कर्मचारी बदल जाए.लेकिन ना तो सिस्टम बदलेगा ना सिस्टम को चलाने वाला।

