डेस्क रिपोर्ट लिविंग इंडिया न्यूज/ हरियाणा, जो फिर से दोहराना नहीं चाहता था वही हुआ, पंचकूला से लेकर सिरसा तक आगजनी हुई, 31 लोग मरे, पुलिस अर्धसैनिक बल, सेना बस देखती रह गई। अब सवाल ये है कि सीएम मनोहर लाल खट्टर की ये नाकामी नहीं तो किसकी है। इन मौतों का जिम्मेदार कौन है।
:-31 मौतों का दोषी कौन ?
:-सरकार का ‘मनोहर’ सिस्टम फेल !
:-स्थिति से निपटने में नाकाम रही मनोहर सरकार
:-सरकार ने क्यों नहीं मानी हाईकोर्ट की बात ?
कहां गया सुशासन, कहां गई सरकार की नीति, एक बार नहीं बल्कि बार बार मनोहर सरकार हरियाणा में फेल हो रही है। और आज फिर हरियाणा में 31 लाशों का ढेर लगा और वही लाचार, कमजोर, बेकार और नाकाम मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कुर्सी पर बैठे देखते रहे।
इन 31 लाशों का दोषी कौन हैं ?
मनोहर लाल, मुख्यमंत्री
बीएस संधू, डीजीपी
रामनिवास, एसीएस
डीएस ढेसी, मुख्य सचिव
या फिर सरकार के मंत्री जो बार बार राम रहीम के गुंडों को अच्छे लोग बताते रहे।
सरकार पर सवाल क्यों नहीं ?
सरकार ने क्यों नहीं मानी हाईकोर्ट की बात ?
हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद डीजीपी को हटाया क्यों नहीं गया ?
पंचकूला कोर्ट परिसर को समय रहते खाली क्यों नहीं करवाया गया?
सिर्फ शांति के साथ अपील क्यों करती रह गई पुलिस ?
धारा 144 में समर्थकों के पास लाठी डंडे, पेट्रोल, पत्थर और हथियार कैसे पहुंचे
क्योंकि अगर आपने हाईकोर्ट की बात मान ली होती, अगर आपने पहले से ही पंचकूला खाली करवा दिया, अगर आपकी पुलिस ने सही तलाशी ली होती होती, तो नाम के लगाए गए धारा 144 में बलात्कारी बाबा के गुंडों के पास लाठियां पत्थर धारदार हथियार और पेट्रोल नहीं होते। अगर आपकी पुलिस सोई नहीं रहती तो गाड़ियों को यूं ना जलाया जाता। मनोहर जी अगर आपकी पुलिस एक्टिव रहती तो यूं चीख पुकार नहीं मचती और लाशों का ढेर हरियाणा फिर से नहीं देखता। मनोहर जी इस हिंसा के नंगे और निर्दयी नाच के लिए सिर्फ और सिर्फ आप और आपकी सरकार जिम्मेदार हैं।
हरियाणा ही नहीं देश का बच्चा बच्चा जानता था कि फैसले के बाद क्या होगा। लेकिन मनोहर लाल नहीं जागे, सरकार सोती रही और प्रशासन शांति मार्च निकालता रहा। चारों तरफ आग, उपद्रव चीख पुकार मची हुई थी। चार दिन पहले से ही मीडिया चिल्ला रही थी। सुरक्षा सलाहकार बार बार कह रहे थे। हिंसा की आशंका से बार बार सरकार को अवगत करवाया गया लेकिन मनोहर लाल तो राम रहीम पर अटूट विश्वास किए बैठे थे। आखिरी वक्त तक पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जज चीख चीख कर सरकार को डीजीपी को हटाने की बात कहते रहे लेकिन डीजीपी को तो हटाना दूर, पंचकूला कोर्ट परिसर से एक डेरा समर्थक को नहीं हटा सके। मनोहर जी ऐसा काम है आपका और आपके नाकाम पुलिस का।
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