दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार भारत में बुलेट ट्रेन लाने की तैयारी कर रही है। वहीं सुपरफास्ट ट्रेन की संख्या भी बढ़ाई गई है। नए कोच शामिल किए जा रहे हैं और सुपरफास्ट सरचार्ज के नाम पर करोड़ो रूपये वसूला जा रहा है। भारतीय इतिहास में पहली दफा केंद्र सरकार ने रेल बजट और आम बजट को एकसाथ कर दिया। मतलब कि अलग से रेल बजट प्रस्तुत नहीं किया गया। लेकिन क्या आपको पता है कि सरकार की इतनी कोशिशों के बावजूद नतीजा क्या निकला, अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं।
भले ही भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्क है और रोजाना करोड़ों लोग इसके सहारे सफर करते हैं। इसके बावजूद रेलवे की सेहत में सुधार नहीं हो रहा है। इसका खुलासा हुआ है सीएजी (CAG) की रिपोर्ट में, जिसमें बताया गया है कि भारतीय रेलवे सुपरफास्ट सरचार्ज के नाम पर करोड़ों रूपये वसूलती है, बावजूद कई ट्रेन ना तो सुपरफास्ट स्पीड से चलती हैं, और ना ही निर्धारित समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं। CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (NCR) और साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) ने सुपरफास्ट सरचार्ज के नाम पर यात्रियों से 11.17 करोड़ रूपये वसूले। इनके बावजूद कुछ सुपरफास्ट ट्रेन 95% से ज्यादा बार लेट हुईं।
इसके अलावा भी CAG ने भारतीय रेलवे से जुड़े कई विषयों की जांच कर उसमें मौजूद खामियों की तरफ भी इशारा किया है। CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रेलवे स्टेशन पर मिलने वाला खाना इंसान के खाने लायक नहीं है। रिपोर्ट बनाने के लिए कैग ने साल 2013 से 2016 के बीच 74 स्टेशन और 80 ट्रेन का जायजा लिया। यह भी बताया गया है कि 21 रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि खानों की क्वालिटी की जांच के लिए हजारों बार निरीक्षण किए गए। CAG ने यह भी बताया है कि रेलवे लाइन के विद्युतीकरण की गति भी तय समय से काफी पीछे चल रही है।
