इंदिरा गांधी के विरोध को दरकिनार कर राजनीति में बनाई जगह

चंडीगढ़ (पंजाब) : राजमाता मोहिंदर कौर के जाने के बाद पटियाला राजघराने के एक युग का समापन हो गया। उनके मृदु स्वभाव और व्यवहार से लोग उन्हें…

चंडीगढ़ (पंजाब) : राजमाता मोहिंदर कौर के जाने के बाद पटियाला राजघराने के एक युग का समापन हो गया। उनके मृदु स्वभाव और व्यवहार से लोग उन्हें काफी सम्मान देते थे। लोगों के बीच राजमाता की लोकप्रियता थी कि कोई उनके निधन की खबर पर भरोसा नहीं कर रहा है। राजमाता मोहिंदर कौर राजनीति में भी सक्रिय रही थीं। इसके अलावा वो सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। बताया जाता है कि सिख धर्म से भी उनका गहरा जुड़ाव था। एक समय तो वो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ भी हो गईं थीं। ऐसा इसलिए कि इंदिरा गांधी चाहती थीं कि राजशाही खत्म करके राज परिवारों को राजनीति से दूर कर दिया जाए। लेकिन राजमाता चाहती थीं कि वो राजनीति में आएं और लोगों की सेवा करें, जबकि राजमाता के पति यादविंदर सिंह भी यही चाहते थे। लेकिन इंदिरा गांधी उन्हें राजनयिक बनाकर विदेश भेज देती थीं, ताकि राजनीति में पटियाला राजपरिवार के प्रवेश की मंशा पूरी ना हो सकें। इन सबके बावजूद राजमाता ने राजनीति से दूरी नहीं बनाई। पति के साथ विदेश में रहते हुए भी राजमाता का राजनीति से गहरा जुड़ाव रहा।

दूसरी तरफ राजमाता के प्रति जनता का इतना स्नेह था कि इंदिरा गांधी के ना चाहते हुए भी मोहिंदर कौर राजनीति में आ गईं। 1964 में राजमाता ने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस पार्टी की तरफ से ही 1967 तक राज्यसभा सांसद रहीं। राजमाता 1967-1971 तक लोकसभा की सदस्य भी रही थीं। राज परिवारों की शक्तियां खत्म होने के बाद भी राजमाता की लोकप्रियता में किसी तरह की कमी नहीं आई। महाराजा यादविंदर सिंह के निधन के बाद राजमाता स्वदेश वापस लौट गईं। पिता के निधन के बाद उनके बड़े बेटे अमरिंदर सिंह महाराजा बने और मोहिंदर कौर राजमाता बन गईं। मोती महल में रहते हुए भी राजमाता ने समाज सेवा से जुड़े कई कार्य किए। राजमाता ने पति के निधन के बाद गहने और महंगे कपड़े पहनना त्याग दिया था। राजमाता के बारे में कहा जाता था कि एक बार भी जो उनसे मिल ले, वो उनका स्नेह कभी नहीं भूल सकता था। आज राजमाता नहीं रहीं, लेकिन उनके संस्कार, उनके बताए गए रास्ते, उनकी यादें और उनका कार्य हमेशा-हमेशा के लिए ना सिर्फ पटियाला बल्कि समूचे पंजाब और देश में याद रखा जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *