हरियाणा में पहली बार अपने बूते पर सत्ता में आई बीजेपी अपने कार्यकाल के 1000 दिन पूरे कर चुकी है। इस के चलते मुख्यमंत्री मनोहर लाल चंडीगढ़ में दोपहर साढ़े तीन बजे अपने कार्यकाल के 1000 दिन का ब्यौरा देंगे। वहीं आपको बता दें कि इन 1000 दिनों में प्रदेश कई तरह के सामाजिक उतार-चढ़ाव से गुजरा तो सियासत के एक दूसरे को शह-मात देने के खेल भी बखूबी चलते रहे। हजार दिन के आखिरी पड़ाव में आते-आते हरियाणा देशभर में लागू जीएसटी व्यवस्था के कारण नए किस्म के आर्थिक दौर में प्रवेश कर गया है।
हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी के लिए शासन चलाना एक नया अनुभव था। प्रदेश की कमान भी राजनीति से दूर रहकर राष्ट्रीय स्वयं सेवल संघ के प्रचारक की भूमिका निभाते आ रहे मनोहरलाल को मिली।किसान भी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों और कर्जमाफी को लेकर सड़कों पर आए। इसी तरह रोडवेज में निजी रूट परमिटों के मुद्दे पर अचानक रोडवेज चक्का जाम के दौर को हरियाणा ने कई बार भोगा। इसी तरह विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से जूझते दिखे। सरकार ने कई मांगे पूरी भी की, लेकिन अभी भी पंजाब के समान वेतन जैसे चुनावी वादों को लेकर बीजेपी सरकार को कटघरे में दिखाई देती है।

