राजनीति के फंदे पर झूल रही किसानों की कर्जा माफी

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में ना तो किसानों की खुदकुशी रूक रही है और ना ही खुदकुशी के नाम पर नेताओं की राजनीति। किसान…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में ना तो किसानों की खुदकुशी रूक रही है और ना ही खुदकुशी के नाम पर नेताओं की राजनीति। किसान जान दे रहे हैं, सरकार बैठक करने की रणनीति बना रही है, विपक्षी बयान ते रहे हैं और दिनोंदिन किसानों की खुदकुशी का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। यह हकीकत है उस पंजाब की जहां के किसानों को सबसे संपन्न मानने की गलतफहमी अभी भी देश के दूसरे राज्यों के लोग देख रहे हैं। अब बात किसानों की जिनके नाम पर पंजाब के भाई-भाई की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही, तब भी मामला किसानों का था, आज भी किसानों का ही है। अजनाला के किसान की खुदकुशी के बाद शिरोमणि अकाली दल प्रधान और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के खिलाफ पर्चा दर्ज किये जाने की मांग की है। वहीं आम आदमी पार्टी ने सीधे सीएम पर ही केस दर्ज करने की मांग करके प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।

दरअसल पंजाब में एक किसान की खुदकुशी ने सियासी बवाल मचा दिया है।  अजनाला के किसान मेजर सिंह ने बैंक से लिए करीब 11 लाख रुपए का कर्ज लिया था और कर्ज नहीं चुका पाया तो जहर खाकर जान दे दी। खुदकुशी के पहले  मेजर सिंह ने एक मार्मिक सुसाइड नोट भी लिखा। जिसमें उसने सुसाइड का जिम्मेदार पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। किसी सीएम को इस तरह सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराने का शायद ये पहला ही मामला है, लेकिन आगे बढ़ने से पहले नजर डाल लेते हैं मेजर सिंह के सुसाइड नोट पर। ”कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस ने सरकार बनने से पहले चुनाव के दौरान किसानों के कर्ज माफी का वादा किया था और सरकार बनने के बाद भी अपनी बात दोहराई थी. लेकिन अब सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही है. जो कर्ज माफी का ऐलान पंजाब सरकार एवं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया है वह बेहद ही कम है.  मुझे कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार से काफी उम्मीदें थी और भरोसा था कि मेरा कर्ज माफ हो जाएगा लेकिन सरकार ने मेरे जैसे किसानों का कर्ज माफ करने को लेकर कुछ भी नहीं किया है. मैं कर्ज की वजह से काफी परेशान हूं और इस वजह से अपनी जान दे रहा हूं।”

दरअसल, ये वो पीड़ा है जो किसान झेल रहे हैं। पहले कर्ज की चोट और फिर वोट के लिए वादों की भरमार ने किसानों को कुछ राहत दी थी और जब ये पूरा नहीं हुआ तो जिस उम्मीद पर किसानों ने सरकार चुनी थी, उन्होंने मौत चुनने में भी देरी नहीं की। लेकिन राजनीति का क्या कीजिएगा ये तो किसानों की लाशों पर भी चलती रहती है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया बुधवार को पीड़ित परिवार से मिलने अजनाला पहुंचे। दोनों नेताओ ने पीड़ित परिवार के साथ दुख साझा किया। साथ में मौजूदा कांग्रेस सरकार पर भी जम कर बरसे। सुखबीर सिंह बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया ने किसान को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के खिलाफ FIR दर्ज किये जाने की मांग की है। बादल का कहना है कि मनप्रीत बादल ने ही विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी का मैनिफेस्टो बनाया था और इस मैनिफेस्टो में किसानो का कर्ज माफ करने का वादा किया गया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

 

 

 

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा है कि उन्हें किसानों की समस्या और मजबूरी की जानकारी है और सरकार धीरे-धीरे किसानों का कर्ज माफ करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि फौरी राहत देने का ऐलान पंजाब सरकार की तरफ से पहले ही कर दिया गया है, लेकिन अभी भी पंजाब सरकार की कोशिशें जारी हैं कि कैसे किसानों को कर्ज के बोझ से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने पंजाब में तमाम बैंको से किसानों के कर्जे के आंकड़े भी मंगवाए हैं। वहीं आप के विधायक कुलतार सिंह संधवा का कहना है कि बैंकों ने किसानों के कर्ज डिटेल्स की जानकारी देने से इंकार कर दिया है। इस लिहाज से कांग्रेस सरकार किसानों का कर्जा माफी कैसे करेगी यह कौन बताएगा। वहीं चुनाव में कर्ज माफी की घोषणा कैप्टन अमरिंदर ने की थी, तो जिम्मेदारी भी उनकी ही तय की जानी चाहिए और केस भी उन पर ही दर्ज होना चाहिए।

इतना ही नहीं, किसान मेजर सिंह का सुसाइड नोट मंगलवार को पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में पढ़ा गया। इस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि किसानो की कर्ज माफ़ी और आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है। कांग्रेस की सरकार के 4 महीनों में सवा सौ से ज्यादा किसान जान दे चुके हैं. विपक्ष घेरने में लगा है, लेकिन सरकार भी गंभीर होती नहीं दिख रही है। क्योंकि इन्हीं किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर दो महीने पहले एक कमिटी गठित की गई थी। हालत ये है कि आज तक एक भी बैठक नहीं हो पाई है। बुधवार को होनी थी, लेकिन वित्त मंत्री को उद्योगपतियों से मिलने के लिए मुंबई जाना था। सो एक बार फिर टाल दी गई। चाहे विपक्ष हमला करे, या कोर्ट सवाल पूछे, सरकार को जब समय मिलेगा, तब किसानों की भी सुध ले लेगी।

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