ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज़: 15 अगस्त को गुरदासपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेश के 50 हजार युवाओं को नौकरी देने का वादा किया। बाकायदा कैप्टन साहब ने ‘घर घर में नौकरी योजना’ की घोषणा कर दी। बताया गया कि रोजगार मेले से युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन बरनाला, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, पठानकोट, होशियारपुर, गुरदासपुर में आयोजित रोजगार मेले की हकीकत ऐसी रही जिसे सुनकर आपको यकीन हो जाएगा कि ‘घर घर में नौकरी योजना’ किसानों की कर्जा माफी जैसी ही ना रह जाए।
पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार ने घर-घर में नौकरी योजना की घोषणा कि, कोशिश रही की युवाओं को नौकरी देकर उनके कंधे से बेरोजगार होने का बोझ उठा दिया जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कैप्टन सरकार का ट्रैक रिकार्ड ऐसा रहा है कि इस पर लोग भरोसा नहीं कर पाते हैं। लिहाजा लोगों को पूरी उम्मीद है कि सरकार का घर-घर में रोजगार योजना भी हवा-हवाई साबित होगा। क्योंकि सरकार ने 50 हजार युवाओं को रोजगार देने का दावा तो कर दिया है, कईयों को सफलता भी मिली, लेकिन जॉब क्या मिलेगा, क्या वो युवाओं को सही मायनों में सशक्त बना पाएगा इसका जिक्र कहीं नहीं है।
दरअसल ये पंजाब में कांग्रेस सरकार के काम करने का तरीका है। और ये इतना शातिराना है कि बच्चे ठगे जाएं तो चकित ना हों आप। किसानों की खुदकुशी पर सरकार की नूरा-कुश्ती आपने देखी होगी। यही हाल घर-घर में नौकरी का भी हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। सरकार के निर्देश पर बरनाला में रोजगार मेला का आयोजन तो किया गया, लेकिन उसमें प्रशासनिक इंतजामात नदारत रहे। अधिकारियों को मतलब नहीं रहा मेला से तो यहां आए बच्चे सरकार को नहीं बेरोजगार होने की अपनी किस्मत को कोस रहे थे।
कुछ ऐसा ही हाल फतेहगढ़ साहिब में देखने को मिला। यहां आयोजित रोजगार मेले में निजी कंपंनियों ने 1200 बच्चों का चयन किया गया। जबकि मेले में आए बच्चों ने सरकार की इस पहल पर ही सवालिया निशान लगाते देर नहीं की। वहीं फाजिल्का में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। निजी कंपनियां आई और बच्चों का चयन करती रही। बच्चे भूख और प्यास से तड़पते रहे। डिप्लोमा कर चुके कई युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कॉल करके बुलाया गया और जब यहां पहुंचे तो कहा गया कि उनके लिए यहां जॉब नहीं है। स्थिति यह है कि वो डिप्लोमा के बावजूद दिहाड़ी करने को विवश हैं।
अब बात गुरदासपुर की करें या होशियारपुर की। हजारों बच्चे मेले में पहुंच तो रहे हैं लेकिन सरकार उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है। प्राइवेट कंपंनियां यहां आ तो रही है, लेकिन बच्चों को किस तरह के जॉब मिलेंगे वो उन्हें पता नहीं है। लुधियाना के आईटीआई कॉलेज में आयोजित मेले में तो दूसरे जिला के भी बच्चे पहुंच चुके हैं। बच्चों ने तो सीधे तौर पर आरोप जड़ दिया कि इस तरह का मेला महज एक ड्रामा है। हालात यह हैं कि हजारों की भीड़ पहुंच रही है और कुछ सौ को ही नौकरी देने की बात कही जा रही है। अब बात पटियाला की, मुख्यमंत्री साहब का इलाका है ये, लेकिन यहां के बच्चों को भी 24 और 25 तारीख को लगने वाले रोजगार मेले से कोई उम्मीद नहीं है।
दरअसल ये सरकार के काम करने का तरीका है। चुनाव में किए गए घोषणा को पूरा करने के लिए सरकार ने 50 हजार युवाओं को नौकरी देने का दावा तो कर दिया। इसके लिए घर-घर में नौकरी योजना की शुरूआत तो कर दी। लेकिन सरकार को खुद पता नहीं कि प्रदेश के कितने युवा बेरोजगार हैं और उनके लिए किस तरह की नौकरी जरूरी है।
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