न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की द्वितीय पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में रामेश्वरम में बनाए गए ‘कलाम स्मारक’ का उद्घाटन गुरूवार को किया गया। स्मारक का उद्धाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस स्मारक का निर्माण डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने किया है और इसमें कलाम की प्रतिकृतियां रखी गई है। स्मारक के उद्धाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने भूतपूर्व राष्ट्रपति के परिजनों से मुलाकात करके बातचीत की। इसके पूर्व स्मारक पहुंचकर मोदी ने परिसर में ध्वजारोहण किया और कलाम की मूर्त्ति का अनावरण किया। स्मारक में कलाम की वीणा बजाते हुए मूर्त्ति स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री ने मूर्त्ति पर फूल चढ़ाकर भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कलाम के परिजनों से बातचीत की साथ ही ‘कलाम संदेश वाहिनी प्रदर्शनी’ बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस देश के विभिन्न राज्यों की यात्रा करके लोगों को डॉ. कलाम की जिंदगी और उनके व्यक्तित्व के बारे में जानकारी देगा। बस पूर्व राष्ट्रपति की जयंती के अवसर पर 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन पहुंचेगा। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नीली क्रांति योजना के लाभुकों के बीच नौका देने से संबंधित मंजूरी पत्र भी वितरित किया। इसके अलावा अयोध्या-रामेश्वरम के बीच चलने वाली नई एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साथ ही रामेश्वर परियोजना की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने NH 87 पर मुकुन्दरायार-छतिराम और अरीचलमलाई के बीच बनाई गई साढ़े नौ किमी लंबी सड़क राष्ट्र को समर्पित किया।
एक साल में डीआरडीओ ने किया तैयार
इस स्मारक का निर्माण डीआरडीओ ने एक साल में किया है। इस स्मारक के सामने का भाग इंडिया गेट की तरह दिखाई देता है, जबकि दो गुंबद राष्ट्रपति भवन की तर्ज पर बनाए गए हैं। स्मारक के अंदर चार मुख्य हॉल हैं। सभी हॉल में डॉ. कलाम से जुड़ी यादों को संजोकर रखा गया है। हॉल एक में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बचपन और शिक्षा के बारे में जानकारी रखी गई है। दूसरे हॉल में डॉ. कलाम के संसद और संयुक्त राष्ट्रसंघ में दिए गए भाषणों से जुड़ी जानकारियां रखी गई है। हॉल तीन में डॉ. कलाम के इसरो और डीआरडीओ में कार्यकाल के बारे में जानकारी रखी गई है। जबकि हॉल चार को शिलांग में उनके अंतिम क्षणों और राष्ट्रपति के बाद के जीवन केंद्रित किया गया है। इसके अलावा डॉ. कलाम की प्रसिद्ध रूद्रवीणा, एसयू-30 एमकेआई फ्लाइट में पहना गया जी-सूट और पुरस्कारों सहित उनकी निजी वस्तुओं को लोगों को दिखाने के लिए एक अलग भाग तैयार किया गया है। भित्तिचित्र और चित्रकला के लिए बारह दीवारों का उपयोग किया गया है। इस संपूर्ण क्षेत्र में डॉक्टर कलाम के व्यक्तित्व विभिन्न रूपों को भी दिखाया गया है। स्मारक के निर्माण में इस्तेमाल किए गए वस्तुओं को देश के विभिन्न हिस्सों से रामेश्वरम लाया गया है। स्मारक के सामने भाग में लगे पत्थर को तंजावुर, पत्थर के आवरण जैसलेमर और आगरा, पत्थर के स्तंभ बंगलुरू और मार्बल कर्नाटक से मंगाया गया है। भित्तिचित्र हैदराबाद, शांति निकेतन कोलकाता और चेन्नई से लिया गया है।

