जोड़ मेला : पौराणिक परंपरा और संस्कार का अलौकिक समागम

डेस्क रिपोर्ट/लिविंग इंडिया : अपनी संस्कारों और पौराणिक परंपराओं को सहेजकर रखने के लिए प्रसिद्ध नंगल के ऐतिहासिक विभोर साहिब गुरूद्वारा में सालाना जोड़ मेला…

डेस्क रिपोर्ट/लिविंग इंडिया : अपनी संस्कारों और पौराणिक परंपराओं को सहेजकर रखने के लिए प्रसिद्ध नंगल के ऐतिहासिक विभोर साहिब गुरूद्वारा में सालाना जोड़ मेला धूमधाम से मनाया गया। मेले के दौरान बड़ी संख्या में देश-विदेश से आई संगतों ने गुरूद्वारा में माथा टेका। दरअसल सिखों के दसवें गुरू श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने यहां पर 13 महीने 13 दिन 13 घड़ियां और 13 पल चुपाई साहब का उच्चारण किया था। आज भी इस पावन परंपरा का निर्वहन परंपराओं के साथ किया जा रहा है। और इस बार भी नंगल के विभोर साहिब गुरूद्वारा में यही अलौकिक नजारा देखने को मिला।

हर साल आयोजित जोड़ मेला में देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं और गुरूद्वारा साहिब में नतमस्तक होते हैं। मंगलवार को भी सुबह से ही गुरूद्वारा साहिब आने वाले लोगों का तांता लगा रहा। गुरूद्वारा साहिब के विशाल दीवान को करीने से सजाया गया था। जहां पर बैठकर सैकड़ों लोगों ने कीर्त्तन रागी जत्था और ढाडी जत्था के बारे में सुना। इस मेले में लोग अपनों से मिलने भी पहुंचते हैं। दरअसल यह परंपरा दशकों से चली आ रही है, जिसे आज भी उतनी ही पौराणिकता के साथ निभाया जा रहा है।

बताया जाता है कि सिखों के दसवें गुरू श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने 13 महीने 13 दिन 13 घड़ियां और 13 पल चुपाई साहिब का उच्चारण किया था। भाद्रपद की अष्टमी को चौपाई पूरी हुई। उस दिन से हर साल इस दिन को बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम से जोड़ मेला के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लंगर सेवा भी की जाती है। कहने का मतलब है कि जोड़ मेला में शामिल होकर आपको जरा भी अहसास नहीं होगा कि वक्त ठहर सा गया है। यह लोगों का परंपरा से लगाव ही है जो आज भी जोड़ मेला को श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है।

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