घर की आर्थिक स्थिति से एक बेटा इतना दुखी रहता था कि वो अपनी मां और गांव से दूर जाने का फैसला कर लेता है। लेकिन कुदरत का इंसाफ देखिए कि तीन साल बाद भी वो अपने घर नहीं लौट सका है। आ रही है तो उसकी याद, जो सूनी आंखों से अपने लाडले का रास्ता देख रही मां की आंखों से आंसू बनकर निकल रही है। ये दर्दनाक कहानी है इराक में आतंकियों की गिरफ्त में फंसे 39 युवकों में से एक धरमिंदर कुमार की।
गुरदासपुर: ईराक में फंसे बेटे का इंतजार कर रही माँ
घर की आर्थिक स्थिति से एक बेटा इतना दुखी रहता था कि वो अपनी मां और गांव से दूर जाने का फैसला कर लेता है।…
