चंडीगढ़: वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने किसानों के मुद्दे पर बैंको के साथ बैठक की। लेकिन जिस मुद्दे पर ये बैठक बुलाई गई थी सरकार और बैंकर्स के बीच सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। क्योंकि सरकार बैंक से किसानों का लोन डाटा उपलब्ध करवाने को कह रही है लेकिन बैंक का कहना है कि वो कस्टमर का निजी डाटा नहीं दे सकते।
बैठक के बाद वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने कहा “बैंकर्स को हमने यही बोला कि तमाम किसान का जो डाटा है वो हमें मिल जाए, लेकिन किसी का भी पर्सनल डाटा वास्तव में बैंक सरकार को देते नहीं हैं, लेकिन बैंक ने सलाह दिया है कि वो एक फार्म भर देंगे, अगर किसान खुद रिक्वेस्ट करेगा कि मेरा डाटा आप सरकार को दें तो ये हो सकता है, तो ये औपचारिकताएं है जो हम महीनों नहीं दिनों में तय करने वाले हैं।“
जाहिर है पंजाब में किसानों की खुदकुशी का मुद्दा गर्म है। विपक्ष सरकार को घेरे बैठा है तो सरकार कोशिश में है कि विपक्ष के सवालों से कैसे बचा जाए।मनप्रीत बादल ने कहा “हमारी इच्छा है और सरकार की कोशिश है कि अगले एक महीने के अंदर सिस्टम पर वर्कआउट कर कम से कम 10 लाख किसान को कर्जामुक्त किया जाएगा“
हालांकि वित्तमंत्री की माने तो उनका कहना है कि बैंकर्स उनकी मदद कर रहे हैं। मनप्रीत बादल ने कहा “बैंकों का मैं शुक्रगुजार हूं, कि ये एक बहुत बड़ा सोशल कॉज है, बैंक सारे मदद कर रहे हैं।“
बैंकर्स से किसानों का डाटा लेने को लेकर वित्तमंत्री ने कहा कि दरअसल इससे किसानों के लोन के बारे में जानने में सहूलियतें होंगी, मनप्रीत बादल का कहना है “हम डाटा के जरिए छोटे और मार्जिनल किसानों, 2 लाख तक कर्ज वालों किसानों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं, सरकार बड़ी संजीदगी से लगी हुई है, भारत का अभी तक कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जो इस एडवांस लेवल तक लोन माफ करने पर काम कर रही हो।“
हालांकि वित्तमंत्री मनप्रीत बादल इस बैठक को सकारात्मक मान रहे हैं लेकिन, बैंकर्स ने किसानों का डाटा सीधे सरकार को देने से इनकार कर दिया है। हालांकि एक ऑप्शन सरकार के सामने बैंकर्स ने जरूर रखा है लेकिन कितने किसान अपना डाटा सरकार को देना चाहेंगे ये तो वक्त ही बताएगा।



