गणतंत्र दिवस के लिए पंजाब सरकार की झांकी मानव एकता के आध्यात्मिक प्रकाश और बलिदान की भावना का प्रतीक

चंडीगढ़, 22 जनवरीः  गणतंत्र दिवस परेड-2026 के लिए पंजाब सरकार द्वारा तैयार की गई झांकी मानव एकता, दया-भावना और धार्मिक मूल्यों के उच्चतम आदर्शों को…

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चंडीगढ़, 22 जनवरीः  गणतंत्र दिवस परेड-2026 के लिए पंजाब सरकार द्वारा तैयार की गई झांकी मानव एकता, दया-भावना और धार्मिक मूल्यों के उच्चतम आदर्शों को बनाए रखने के लिए आध्यात्मिकता और बलिदान की निस्वार्थ भावना का अनूठा प्रतीक है।

सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि इस झांकी के दो हिस्से हैं- ट्रैक्टर और ट्रेलर।

झांकी के ट्रैक्टर हिस्से में हाथ का निशान बना हुआ है, जो मानवतावादी और दया-भावना वाले दृष्टिकोण को दर्शाते हुए आध्यात्मिकता का प्रकाश बिखेरता है। इसके साथ ही इसके आगे के हिस्से में ‘एक ओंकार’ (परमात्मा एक है) का निशान है, जिसे घूमते हुए दिखाया गया है और कपड़े का एक टुकड़ा जिस पर ‘हिंद दी चादर’ की उकेरी हुई लिखावट है, जो जुल्म से रक्षा की गुहार लगाने वालों के लिए सुरक्षा का प्रतीक है।

ट्रेलर वाले हिस्से में रागी सिंहों द्वारा ‘शब्द कीर्तन’ किया जा रहा है, जिसके पिछले हिस्से में ‘खंडा साहिब’ का निशान है जो पूरे परिवेश को एक अलौकिक और आध्यात्मिक रंगत में रंग देता है। यह स्थान दिल्ली के गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब के ठीक सामने सुशोभित है और इस चौक पर रोजाना शब्द कीर्तन होता है।

ट्रेलर वाले हिस्से के किनारे पर गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब का मॉडल सुशोभित है, जिस स्थान पर नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी को शहीद किया गया था।

साइड पैनल गुरु साहिब के श्रद्धालु सिख भाई मती दास जी, जिन्हें जिंदा आरे से चीरकर शहीद किया गया था, भाई सती दास जी, जिन्हें ऊन में लपेटकर जिंदा जला दिया गया था और भाई दयाला जी, जिन्हें उबलती देग में डालकर शहीद किया गया था, की शहादत को दर्शाते हैं। ये सिख श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के समर्पित श्रद्धालु थे और गुरु साहिब के उच्च आदर्शों की नितनेम के साथ पालना करते हुए उन्होंने शहादत का मार्ग चुना। प्रवक्ता ने आगे कहा कि इन सिख श्रद्धालुओं की शहादत ने मानवता के लिए एक अलौकिक मिसाल कायम की।

उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की अगुवाई में नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी का 350वां शहीदी दिवस 23 नवंबर से 29 नवंबर, 2025 तक श्री आनंदपुर साहिब में मनाया गया था, जिसमें विभिन्न धार्मिक समागम पूरी श्रद्धा-भावना और धार्मिक जाहो-जलाल के साथ करवाए गए।

राज्य सरकार ने पहली बार भाई जैता जी यादगार स्थल पर पंजाब विधान सभा का विशेष सत्र करवाया, जिससे यह इतिहास के पन्नों में एक अनूठा समागम बन गया है।

धार्मिक समागम 25 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब में अरदास के साथ शुरू हुए। इसी तरह श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर), तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, फरीदकोट और गुरदासपुर से नगर कीर्तन चलकर पवित्र नगरी श्री आनंदपुर साहिब में समाप्त हुए। इसके अलावा पूरे पंजाब में नगर कीर्तन और धार्मिक समागम करवाए गए।

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