PM Security Breach: पीएम मोदी की सुरक्षा चूक मामले में चार साल बाद भी चालान दाखिल नहीं कर पाई पंजाब पुलिस, अभी भी कानूनी औपचारिकताएं बाकी

PM Security Breach Police Investigation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर दौरे के दौरान हुई चूक का मामला एक बार…

PM Security Breach Police Investigation:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर दौरे के दौरान हुई चूक का मामला एक बार फिर चर्चा में है. घटना के चार (PM Security Breach) साल बाद भी पंजाब पुलिस आरोपियों के खिलाफ चालान पेश नहीं कर पाई है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है. कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर में पीजीआई सैटेलाइट सेंटर का शिलान्यास करना था. इस दौरान प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से फिरोजपुर के लिए रवाना हुए थे.

PM Security Breach, कानूनी औपचारिकताएं अभी बाकी-

डीएसपी करण शर्मा ने बताया कि यह मामला जनवरी 2022 का है और 6 जनवरी को थाना कुलगढ़ी में एफआईआर दर्ज की गई थी. इस पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की गई है. उन्होंने कहा कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ कानूनी औपचारिकताएं अभी बाकी हैं. पुलिस का दावा है कि जल्द ही जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया जाएगा. चार साल बाद भी इस संवेदनशील मामले में चालान दाखिल न होना कई सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब मामला देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.

फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक रुका रहा पिएम का काफिला-

रैली स्थल से करीब सात किलोमीटर पहले गांव प्यारेआना में किसानों के धरने के कारण प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर करीब 15 से 20 मिनट तक रुका रहा. सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने आगे जाने का फैसला रद्द कर दिया और वहीं से वापस लौट गए. बाद में दिल्ली लौटते समय प्रधानमंत्री ने राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी से कहा था कि अपने मुख्यमंत्री को कहना कि मैं जिंदा लौट आया.

अधिकारियों पर भी लिया था एक्शन-

वर्ष 2023 में इस मामले में लापरवाही के आरोपों के चलते उस समय के एसपी ऑपरेशन गुरविंदर सिंह, डीएसपी प्रीतम सिंह, डीएसपी जगदीश कुमार, इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह, इंस्पेक्टर जसवंत सिंह और एसएसआई राकेश कुमार को निलंबित कर दिया गया था. इसके अलावा तत्कालीन एसएसपी हरमनदीप हंस सहित अन्य अधिकारियों के तबादले भी किए गए थे.

कांग्रेस सरकार की थी सरकार –

घटना के समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री थे. इस घटना के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी और केंद्र सरकार ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक बताया था. प्रधानमंत्री के काफिले को रोकने के मामले में थाना कुलगढ़ी में करीब 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. बाद में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच के बाद इस मामले में धारा 307, 353, 186, 149, 341 और 8बी नेशनल हाईवे एक्ट समेत कई गंभीर धाराएं जोड़ी गईं.

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