Punjab Day 2023: 1 नवंबर यानी आज के दिन भारत में कई ऐतिहासिक बदलाव हुए थे. कई साल पहले आज ही के दिन देश के विभिन्न राज्यों को भाषा के आधार पर पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया था. आज ही के दिन वर्ष 1956 से वर्ष 2000 तक भारत के छह अलग-अलग राज्यों का जन्म हुआ. इसमें पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और केरल शामिल हैं.
पंजाब का प्रथम विभाजन
पंजाब का पहला विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ और आधा पंजाब पाकिस्तान में रह गया. फिर 1 नवंबर 1966 को पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बनाये गए.
पांच नदियों की भूमि
‘पंजाब’ फ़ारसी के दो शब्दों पंज और आब से मिलकर बना है. ये पांच नदियों सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम से मिलकार बना हैं. यूनानी लोग पंजाब को पेंटापोटामियंस के नाम से जानते थे, जो पांच एकत्रित नदियों का एक अंतर्देशीय डेल्टा है. ऐतिहासिक रूप से, पंजाब यूनानियों, मध्य एशियाई, अफगानियों और ईरानियों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप का प्रवेश द्वार रहा है. कृषि पंजाब का सबसे बड़ा उद्योग है.
पंजाबी भाषी समुदाय के लिए शहीद
1 नवंबर, 1966 को वर्तमान पंजाब अस्तित्व में आया, जिसमें से चंडीगढ़, डलहौजी, ऊना, अंबाला, करनाल, गंगानगर, सरसा जैसे पंजाबी भाषी क्षेत्रों को द्वंद्ववाद और राजनीतिक साजिशों के परिणामस्वरूप अलग रखा गया. ज्ञानी गुरमुख सिंह ‘मुसफ़र’ को नवगठित पंजाबी प्रांत का मुख्यमंत्री बनाया गया. उनके बाद पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री जस्टिस गुरनाम सिंह को अकाली दल के विधायकों ने नेता चुना. पंजाबी प्रांत के इतिहास में पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि को लागू करने के लिए सबसे मजबूत कदम उठाने और ठोस निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री सरदार लछमन सिंह गिल का नाम आज भी पंजाबी भाषा के सच्चे सपूत के रूप में याद किया जाता है. सरदार गिल के अलावा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों और चंडीगढ़ को पंजाब में शामिल करने के लिए संघर्ष करने वाले शहीद दर्शन सिंह फेरुमान का बलिदान सिख इतिहास में बहुत सम्माननीय है. उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया, लेकिन पंजाब विरोधी सरकार ने उनकी बात नहीं मानी. अंततः 27 अक्टूबर 1969 को भाई दर्शन सिंह फेरुमान 74 दिनों तक भूखे रहने के बाद पंजाबी भाषी क्षेत्रों के अधिग्रहण के लिए शहीद हो गए.



