Faridkot Suicide Cremation: फ़रीदकोट के कोटकपूरा में दो किसानों के शव एक ही चिता में, अंतिम संस्कार, पिछे छोड़ गए बच्चीयां

Faridkot Brother’s Suicide Cremation: फ़रीदकोट के हल्का कोटकपूरा के गांव हरिणों में कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले दो किसान भाइयों का गांव के श्मशान…

Faridkot Suicide Cremation: फ़रीदकोट के कोटकपूरा में दो किसान भाइयों के शव एक ही चिता में, अंतिम संस्कार, पिछे छोड़ गए बच्चीयां

Faridkot Brother’s Suicide Cremation:

फ़रीदकोट के हल्का कोटकपूरा के गांव हरिणों में कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले दो किसान भाइयों का गांव के श्मशान घाट में एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर परिवार वालों और गांव वालों के अलावा भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाला और जिला प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार मौजूद थे। उन्होंने परिवार के साथ दुख बांटा।

दोनों भाइयों  की एक चिता

एक दिन पहले कोटकपूरा के पास गांव ढाब बामनवाला के पास गांव हरीनो के किसान जसकरण सिंह और उनके छोटे भाई जसविंदर सिंह ने ट्रेन के नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए GRP पुलिस ने फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। जिसके बाद गांव के श्मशान घाट में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया। दोनों भाइयों को एक ही चिता में रखा गया।

पिछे छोड़ गए लड़कीयां और बधिर माता पिता

उन्हें मुखाग्नि उनके भांजे ने दी। दोनों मृतक भाइयों की एक-एक लड़कीयां है। परिवार में बिरध माता-पिता और दोनों की पत्नियां है और परिवार का पालन पोषण करने वाला इस समय कोई नहीं है। जिसके चलते दल्लेवाला ओर गांव वालों ने सरकार से मांग की है इनके रुजगार का कोई प्रबंध किया जाए। कर्ज माफ किया जाए।

किसानों को कर्ज से बचाने के सरकार करें कोशिश

इस मौके पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाला ने कहा कि पहले भी कर्ज की वजह से किसान आत्महत्या करते रहे हैं। दो भाइयों ने मिलकर यह कदम उठाया है। जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें किसानों को कर्ज से बचाने के लिए कोई सही कोशिश नहीं कर रही हैं। इसका खामियाजा छोटे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खेती अब फायदे का धंधा नहीं रही।किसान भाइयों के परिवार को सरकार की तरफ से मदद मिले। मिरतक किसान भाइयों की बच्चीयों के पढ़ाई और रुजगार का प्रबंध सरकार करे। अगर इन बच्चीयों लिए संघर्ष करना पड़ा तो हम करेन्गें।

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