BBMB Dispute and Land Revenue Cess:
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर नया लैंड रेवेन्यू सेस लगाने का फैसला लिया गया है. इसके बाद पंजाब को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है. सरकार ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स (BBMB Dispute) पर 2 प्रतिशत “भूमि मालिया सेस” (लैंड प्रीमियम सेस) लगाकर एक नया टैक्स लगाया है.
BBMB Dispute पंजाब, हरियाणा और राजस्थान पर होगा असर-
हिमाचल सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर 2 प्रतिशत लैंड रेवेन्यू सेस लागू किया है. इससे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के तहत आने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं पर कुल 433 करोड़ रुपये से ज्यादा का वार्षिक बोझ बढ़ जाएगा. इस अतिरिक्त खर्च को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को सांझा रूप से वहन करना होगा. फैसले को लेकर BBMB ने हिमाचल सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है. 3 जनवरी को हुई एक बैठक में हिमाचल के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सेस सभी हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर लागू किया जाएगा.
वॉटर सेस को गैर-कानूनी –
हिमाचल सरकारों ने इससे पहले भी 16 मार्च, 2023 को राज्य ने ऐसे प्रोजेक्ट्स पर वॉटर सेस लगाया था. जिससे अकेले पंजाब पर सालाना करीब 400 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता. हालांकि, केंद्र सरकार ने वॉटर सेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया. मार्च 2024 में हाई कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया. उस समय, हिमाचल प्रदेश का लक्ष्य वॉटर सेस के ज़रिए अपने 188 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये इकट्ठा करना था.
इससे जुड़े राज्यों से आपत्तियां भी मांगी गई हैं. पंजाब सरकार ने 24 दिसंबर को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये परियोजनाएं व्यावसायिक नहीं बल्कि जनहित से जुड़ी हैं और भूमि अधिग्रहण के समय मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है.



