Barnala Suicide:
बरनाला के गांव रूरके कलां के एक दिव्यांग जोड़े ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और डीजीपी पंजाब से अपने पिता मेजर सिंह की मौत के लिए ज़िम्मेदार तीन आरोपियों को गिरफ़्तार करने की मांग की है। एक किसान ने अपनी 12 एकड़ जमीन की गलत रजिस्ट्री से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। जिसके बाद पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया लेकिन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। जिसे लेकर दिव्यांग पति-पत्नी और तीनों बहनें अपने पिता की मौत के लिए जिम्मेदार तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रही हैं।
12 एकड़ ज़मीन हड़पने के आरोप
जानकारी देते हुए दिव्यांग कुलविंदर कौर और उनके बेटे सुखमनप्रीत सिंह ने बताया कि 75 साल के मेजर सिंह की तीन बेटियां थीं। घर पर कोई भाई नहीं था। शादी के बाद तीनों बहनें अपने-अपने परिवारों के पास चली गईं। मेजर सिंह उनके पिता मेजर सिंह की 12 एकड़ ज़मीन का मालिक था। ज़मीन के लालच में उसके चाचा के बेटे ने उसकी 12 एकड़ ज़मीन हड़पने के लिए दो अलग-अलग नकली आधार कार्ड बनवाए। उसकी जाली रजिस्ट्री करवा ली। जिसका पता चलने पर विरोध किया गया। माननीय अदालत में केस भी किया गया। जहाँ मेजर सिंह को जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं।
छत में फंदा लगाकर की आत्महत्या-
इसके बाद वह अपने पिता मेजर सिंह को अपने साथ अपने गाँव रुरके कलां ले आया। पिछले चार साल से उसके साथ रह रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसे खुलेआम धमकियाँ मिल रही थीं। जिससे परेशान होकर मेजर सिंह ने घर की अटारी पर लोहे की छत के गार्डर से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस स्टेशन रुरके कलां में नकली रजिस्ट्री करवाने वाले और अपने पिता की मौत के लिए ज़िम्मेदार वीरपाल कौर, हरदीप सिंह और मनजीत कौर के खिलाफ़ 108,351(2) के तहत केस दर्ज किया गया। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ़्तार नहीं कर रही है।
मुख्यमंत्री और DGP से मद्द की अपील-
दिव्यांग होने के बावजूद वे कई बार पुलिस थानों के चक्कर लगाकर तंग आ चुके हैं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और DGP पंजाब से मांग की है कि उनके पिता की मौत के लिए जिम्मेदार मां, बेटे और बहू को गिरफ्तार किया जाए और उन्हें इंसाफ दिया जाए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर यह भी शक जताया कि इस मामले में दोनों महिलाओं को निकाला जा रहा है। इस मामले के बारे में रोरेके कलां थाने के SHO बलविंदर सिंह ने बताया कि किसान मेजर सिंह ने जमीन के झगड़े से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। जिसके तहत अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।



