SIR Supreme Court Order:
12 राज्यों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) पर जबरदस्त दबाव है. जिसके चलते बीते दिनों अनेक बीएलओ की आत्म हत्या की खबरें हमारे समने आई. इन स्थितियों को देखते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य सरकारों के लिए निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा है कि बीएलओ के काम के घंटे कम करने के लिए राज्य सरकारें अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करे. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की.
कर्मचारी कर्तव्यों का पालन करने के लिए बाध्य-
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया वैध को पूरा करना होगा. अगर कहीं स्टाफ की कमी है तो यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने कहा कि राहत न मिलने की स्थिति में बीएलओ कोर्ट का रुख भी कर सकते है. सीजेआई ने कहा कि राज्य द्वारा एसआईआर के लिए चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए कर्मचारी इन कर्तव्यों का पालन करने के बाध्य हैं. यदि उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो राज्य सरकार इन कठिनाइयों को दूर कर सकती है.
काम पुरा न करने वाले बीएलओ पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई-
वहीं कोर्ट ने राज्यों को साफ निर्देश दिए कि बीएलओ पर दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करें. कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि अगर कोई बीएलओ व्यक्तिगत कारणों से एसआईआर करने में सक्षम नहीं है तो उचित कारणों की स्थिति में उन्हें राहत देने पर विचार किया जाए. उनकी जगह किसी दूसरे को काम पर लगाया जाए. सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि हमारे पास 35 से 40 बीएलओ की जानकारी है जिन्होंने आत्महत्या की है. रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के तहत एसआईआर में शामिल कर्मियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस भेजी जा रही जिसमें कहा गया है कि यदि वे समय सीमा का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें 2 साल की कैद हो सकती है. यूपी में बीएलओ के खिलाफ 50 एफआईआर दर्ज की गई हैं.



