ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: पंजाब में आए दिन कर्ज के तले किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा । वहीं सरकार किसानों का कर्ज माफ करने और मुआवजा देने की बात तो करती है मगर जमीनी हकिकत पर कुछ नहीं होता है। फिर भी किसान कर्ज का बोझ लेकर सरकार से उम्मीद लगाए रहता है। और जब किसान को सरकार की ओर से कुछ नहीं मिलता तो वो परेशान होकर आत्महत्या कर लेता है।
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* कर्ज तले दो किसानों ने आत्महत्या की
* पुलिस प्रशासन पर भी उठे सवाल
* परिजनों ने राजिंदरा अस्पताल पर दिया धरना

सरकार में आने पहले कैप्टन अरविंदर सिंह ने किसानों को वादा किया था कि अगर पंजाब में उनकी सरकार आती है तो वे किसानों का कर्ज माफ कर देंगे। मगर चुनाव भी हुआ| कैप्टन सरकार में भी आए लेकिन किसानों की समस्या आज भी वैसी की वैसी है। किसान आज भी कर्ज के बलि चढ़ रहे हैं। पंजाब के बंठिडा में किसान राजपाल सिंह ने कर्ज के चलते आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि राजपाल सिंह के ऊपर करीब 8 लाख का कर्ज था। जिसके कारण मृतक किसान काफी परेशान रहता था। साथ ही सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाकर बैठा था। मगर सरकार है जो केवल चुनाव के समय किसानों को बड़े-बड़े सपने दिखाती है। लेकिन मुआवजे के नाम पर केवल इंतजार करवाती है।
दूसरी ओर पटियाला में भी कर्ज ने एक किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया। मगर इस मामले में किसान को केवल कर्ज ने ही नहीं… बल्कि पुलिस प्रशासन ने भी आत्महत्या करने पर मजबूर किया। बताया जा रहा है कि मृतक किसान के सर पर बैंक का करीब 3 लाख रुपए का कर्ज था और वहीं दूसरी ओर किसान को अपने एक साथी से 11 लाख रुपए वापस लेने थे। मगर किसान का साथी उसे पैसे नहीं दे रहा था। जिसके चलते किसान ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। और पुलिस प्रशासन है जो सोती रही मगर किसान की शिकायत पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की। जिसके कारण परेशान होकर किसान ने आत्महत्या कर ली।
किसान की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने राजिंदरा अस्पताल के बाहर धरना दिया। साथ ही मांग कि उन्हे मुआवजे के तौर पर पांच लाख और सारा कर्ज माफ किया जाए साथ ही परिवार में किसी एक को सरकारी नौकरी दी जाए। दूसरी और धरने की सूचना मिलने पर तहसीलदार सुभाष भारद्वाज मौके पर पहुंचकर गुस्साए परिजनो से बातचीत कर उन्हें शांत किया। साथ ही आश्वासन दिया कि अगले दो दिन में उनकी सारी मांगी पूरी कर दी जाएगीं।
फिलहाल परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया है, वहीं सरकार किसानों के कर्ज माफी और मुआवजे को लेकर कई योजना बना रही है मगर ऐसे में सवाल ये है कि जब तक सरकार इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाएगी तब तक न जाने कितने किसान कर्ज तले अपनी जान दे चुके होंगे।
