किसानों की खुदकुशी की राजनीति, बयानबाजी में सिमटा राहत का ऐलान!

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मजदूर भी अपनी जान दे रहे हैं, लेकिन सरकार को लगता है कि किसानों…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मजदूर भी अपनी जान दे रहे हैं, लेकिन सरकार को लगता है कि किसानों के हित में जितना काम पंजाब सरकार कर रही है, उतना देश में कोई दूसरा राज्य नहीं कर रहा। सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि अगर किसान इतने पर खुश नहीं हैं तो इससे ज्यादा की गुंजाइश नहीं हो सकती। रोजाना किसान मर रहे हैं। अब तो मजदूरों ने भी मौत को गले लगाना शुरू कर दिया है। लेकिन सूबे के मुखिया को लगता है कि पंजाब के किसानों के लिए सरकार जितना कर रही है, वो सबसे ज्यादा है। उनकी लिस्ट में सिर्फ पड़ोसी राज्य ही शामिल नहीं हैं, बल्कि कैप्टन की मानें तो इससे ज्यादा की गुंजाइश हो भी नहीं सकती।

कैप्टन चाहे जितने दावे करें, लेकिन किसान परेशान हैं। बारिश के बावजूद पटियाला में चल रहा धरना इसका उदाहरण है। और यही बात अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल भी दोहरा रहे हैं। बार बार कांग्रेस की सरकार को झूठ की सरकार बता रहे हैं। किसान मर रहे हैं। धरने दे रहे हैं। बारिश में भीग रहे हैं। फसलें खराब हो रही हैं। ये एक पहलू है। अब इस खबर का दूसरा पहलू देखिए, सरकार सफाई दे रही है, हमेशा की तरह विपक्ष आरोप लगा रहा है। कुल मिलाकर राजनीति हो रही है। होती रहेगी। किसान रहेगा और दुखी ही रहेगा। क्योंकि समाधान कोई करना नहीं चाहता, समाधान के बाद किसानों की खुदकुशी रूकने पर राजनीति की दुकान बंद हो जाएगी।

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