गुरदासपुर उपचुनाव : हार-जीत के दावों के बीच खामोश दिख रहा जनता का मिजाज

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए नेता तैयार हैं। घर-घर जाकर वोट मांगने का सिलसिला जारी है। बड़े नेता तो शालीनता से…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए नेता तैयार हैं। घर-घर जाकर वोट मांगने का सिलसिला जारी है। बड़े नेता तो शालीनता से जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन पार्टी में सेकेंड लाइन के जो नेता हैं, उनका बड़बोलापन और हमले की नीति आपका ध्यान जरूर खींच लेगी। राजनीतिक बयानबाजी और हमले की नीति के तहत ही कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने BJP उम्मीदवार स्वर्ण सलारिया पर तीखा तंज कसा है।

धर्मसोत ने कविता खन्ना पर धक्का होने का आरोप मढ़ा है। ये बात कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री भी कह रहे हैं। क्या इसी धक्के की वजह गुरदासपुर से कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने कविता खन्ना से मुलाकात की? कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं, हर व्यक्ति अपने हिसाब से व्याख्या कर रहा है। इन्हें किनारे रखिए। रविवार को गुरदासपुर से दूर जहां भी बड़े नेताओं से बात की गई, सबने जीत का दावा किया और विरोधी के हार की भविष्यवाणी।

फिर क्या कैप्टन साहब और सुखबीर सिंह बादल, सभी की जुबान पर जीत के दावे ही दिखे। दावा करने वाले कैप्टन साहब अकेले नहीं हैं। उनके साथ सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी गुरदासपुर में जीत का दावा किया है। अकाली-बीजेपी गठजोड़ की जीत का दावा। गुरदासपुर में फोर्स लगाकर कैप्टन के 6 महीने के रिकॉर्ड की पोलखोल का दावा। खैर, चुनाव है तो राजनीति होगी और राजनीति होगी तो हार-जीत के दावे भी होते रहेंगे।

अब हार-जीत से इतर चलते हैं BJP कैंडिडेट पर। दरअसल, BJP के कैंडिडेट स्वर्ण सिंह सलारिया पर सवाल भी हैं। उस सलारिया पर, जो BJP के उम्मीदवार हैं, उस सलारिया पर, जो बड़े बिजनेसमैन भी हैं, उस सलारिया पर जिन पर बाहरी होने का ठप्पा भी है। जितनी ढपली, उतने राग। जितने मुंह उतनी बातें। नेताओं का क्या है, दावे करते रहेंगे, लेकिन तय तो पब्लिक को करना है, यानी गुरदासपुर की जनता को।

दरअसल, यह राजनीति है जहां सामने वाला खुद को विजेता कहता है। अब, चुनाव प्रचार का दौर शुरू होने वाला है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा। सभी खुद को अच्छा और दूसरे को बुरा कहेंगे। यह भी हो सकता है कि तीखी बयानबाजी भी की जाए। बाकी तो 15 अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा, तब तक सबका मुगालता बना रहना चाहिए। अब मुगालते में रहने कभी-कभी राजनेताओं के लिए जरूरी भी रहता है।

 

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