न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : नवरात्री के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की आराधना की जा रही है। ब्रह्मचारिणी दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला ब्रह्म मतलब तपस्या और दूसरा चारिणी मतलब आचरण। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से त्याग, संयम में वृद्धि होती और मां का विशेष आशीष मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी हर वक्त तपस्या में लीन रहती हैं। उनके एक हाथ में माला तो दूसरे में कमंडल होता है। मां की उपासना ने दौरान इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
भगवान शिव को पाने के लिए मां ने किया तप
भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां ने हजार सालों तक तपस्या किया था। मां ने कठिन परिस्थितियों में तपस्या करती रहीं। हजार वर्षों तक मां की तपस्या जारी रही। आखिर में मां को भगवान शिव के पति के रूप में प्राप्त होने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। यही कारण है कि मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और आराधना का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि मां की पूजा से विजय की प्राप्ति के साथ सारी मनोकामना पूरी होती है। इस दिन उन कन्याओं का पूजन होता है जिनका विवाह तय हो गया है। कन्याओं को घर बुलाकर उनके पूजन के साथ भोजन कराने के उपरांत वस्त्र, पात्र आदि भेंट स्वरूप दिए जाते हैं।

