SYL नहर : 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा भविष्य !

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर का काम भले ही अभी तक पूरा नहीं हुआ हो। लेकिन इस पर पंजाब से लेकर…

न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर का काम भले ही अभी तक पूरा नहीं हुआ हो। लेकिन इस पर पंजाब से लेकर हरियाणा की राजनीतिक पार्टियों ने जमकर राजनीति की। हालात यह रहे कि SYL के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा में कई बार चक्का जाम का ऐलान किया गया। तमाम आंदोलन चलाए गए, लेकिन आज भी SYL का मुद्दा सुलझा नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ सभी की निगाहें टिकी हुई है। दरअसल 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में SYL मुद्दे पर अहम सुनवाई होनी है। जबकि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर पंजाब और हरियाणा दोनों सरकार की निगाहें टिकी हुई है।

7 सितंबर की सुनवाई तय करेगी दिशा

इसके पहले 11 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा को एकसाथ बैठकर मामले को हल करने का निर्देश दिया था। दोनों राज्यों की बैठक केंद्र सरकार के हस्तक्षेप में होनी थी, लेकिन इस दिशा में किसी तरह की पहल नहीं की गई। पंजाब सरकार ने इस मुद्दे पर केंद्र से किसी तरह की बात नहीं की, लिहाजा SYL का मुद्दा सुलझ नहीं सका है या सुलझने की गुंजाइश भी नहीं दिखाई दे रही है। अब 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद SYL मुद्दे पर दोनों राज्यों का रूख क्या होगा, इसका पता चलेगा। फिलहाल सारी उम्मीदें अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई है।

पानी से ज्यादा बहा SYL में राजनीति

दरअसल सतलुज और यमुना नदी को जोड़ने के लिए करीब 214 किमी की नहर बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। जिसमें 122 किमी पंजाब और 92 किमी का इलाका हरियाणा में पड़ता है। इस कंसेप्ट को धरातल पर उतारने के लिए SYL नहर की शुरूआत की गई। 1960 में अंतर राज्यीय जल संधि के बाद SYL की उम्मीद काफी बढ़ गई। 8 अप्रैल 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में नहर की खुदाई का काम शुरू किया था। इसके बाद करीब 34 साल गुजर गए हैं। SYL में जितना पानी नहीं बहा उससे ज्यादा राजनीति बह चुकी है। पंजाब और हरियाणा की सारी राजनीतिक पार्टियों ने SYL पर की तो सिर्फ राजनीति। जिसका नतीजा यह हुआ कि आज तक यह मामला सुलझ नहीं सका है।

चुनाव में मुद्दा ही बना रह गया SYL

SYL का मुद्दा इतना बड़ा है कि इसे चुनाव में भी जमकर उठाया गया। सूबे की कैप्टन सरकार ने भी चुनाव के दौरान SYL का मुद्दा जमकर उठाया था। चुनाव हो गए और कांग्रेस सत्ता में आ गई है। हैरानी की बात यह रही कि SYL को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की पैरवी तक नहीं की। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन तक नहीं करवा पा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ निर्देश दिया था कि पंजाब सरकार SYL के मुद्दे पर हरियाणा सरकार से बात करे। लेकिन पंजाब सरकार ने इस दिशा में किसी तरह की पहल नहीं की। जाहिर है चुनाव में किए गए वादे के बावजूद भी कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *