अमृतसर : अगस्त 1947 में देश को आजादी तो मिल गई, लेकिन बंटवारे का ऐसा जख्म भी साथ मिला जिसकी टीस रह-रहकर उठती रहेगी। गुरूवार को अमृतसर में बने पार्टिशन म्यूजियम का उदघाटन सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया तो बंटवारे का दर्द एकबार फिर ताजा हो गई। दरअसल 17 अगस्त को पार्टिशन रिमेमबरेंस डे के रूप में याद किया जाता है। इसलिए इस अवसर पर म्यूजियम का उदघाटन किया गया। उदघाटन के अवसर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने संबोधन में बंटवारे को इतिहास के एक बुरे अध्याय के रूप में याद किया। साथ ही म्यूजियम के निर्माण में उद्योगपति लॉर्ड मेघनाथ देसाई के प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि इस म्यूजियम से देश के युवाओं को भी इतिहास को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
सीएम ने बंटवारे के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि बंटवारे का दर्द झेल चुके लोगों को दास्तान बताने के लिए म्यूजियम का निर्माण कराया गया है। उनकी स्वर्गीय मां राजमाता राजिंदर कौर ने बंटवारे के दौरान कई लड़कियों को वापस घर लौटने में मदद की थी। कार्यक्रम के दौरान मशहूर गीतकार की किताब ‘फूटप्रिंट्स ऑन जीरो लाइन : राइटिंग्स ऑन द पार्टिशन’ का विमोचन किया गया। गीतकार गुलजार ने भी बंटवारें के बारे अपने विचार रखे। कहा कि उनकी किताब में बंटवारें के उन पक्षों को छूने का प्रयास किया गया है, जो शायद आज तक अछूते थे। वहीं बंटवारें पर एक नाटक ‘कहानीवाला’ का मंचन भी किया गया। जबकि हशमत सुल्ताना बहनों के सूफी गीत प्रस्तुत करके उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के दौरान पार्टिशन म्यूजियम ट्रस्ट की किश्वर देसाई ने राज्य सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयास से इस म्यूजियम को हकीकत में बदलने में मदद मिली। म्यूजियम का निर्माण गोल्डन टेम्पल के कॉम्प्लेक्स के नजदीक बने टाऊन हॉल बिल्डिंग में कराया गया है। उर्दू को प्रख्यात लेखक सआदत हसन मंटो की कहानियों के आधार पर म्यूजियम की रूपरेखा तैयार की गई। वहीं बंटवारे से जुड़े सामानों को भी म्यूजियम में रखा गया है। पूरी कोशिश की गई है कि म्यूजियम के माध्यम से लोग इतिहास से सबक लेकर अपने शानदार और शांति को समर्पित भविष्य का निर्माण कर सकें।


