ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज:– अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पलवल के सरस्वती महिला कॉलेज में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । गोष्ठी में कालेज किप प्रिंसिपल शशि शर्मा आदि वक्ताओं ने बताया की हमारे देश में प्राचीन पुरातन सनातन संस्कृति में पर्दा तथा दहेज़ जैसी कुप्रथाएं नहीं थी। वेदों और पुराणों में भी कहीं भी इस तरह की कुप्रथाओं का वर्णन नही है, जबकि ओमर जैसे अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लेखकों ने दूसरे देशों में महिलाओं को दयम दर्जे का नागरिक माना जाता था। इस अवसर पर कालेज परिसर में कराई गई विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्व्वल आने वाली छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में एकड़मी निर्देशक आर एस चौधरी ,कॉलेज के प्राचार्य शशि शर्मा सहित स्टाफ ने छात्राओं को संबोधित कर नारी शक्ति का अहसास करवाया। इस मौके पर कॉलेज में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार दे सम्मानित भी किया गया। जैसा कि आप जानते ही हैं महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है।
इस वर्ष भी कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को संबोधित करते हुए कॉलेज की प्राचार्य शशि शर्मा ने बताया कि, महिला दिवस का मतलब महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और जेंडर इक्वेलिटी पर बात करना है। महिलाओं द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इंटरनेशनल वुमन्स डे महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, युनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को महिला दिवस मनाने की शुरुआत की थी लेकिन उससे पहले 1909 में ही इसे मनाने की शुरुवात की गई थी।उन्होंने बताया कि 1909 में अमेरिका में पहली बार 28 फरवरी को महिला दिवस मनाया गया था। सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 1908 में गारमेंट वर्कर्स की हड़ताल को सम्मान देने के लिए इस दिन का चयन किया था। कालेज पीआरओ एवं प्रवक्ता नरेश पाठक ने भी मातृशक्ति पर प्रकाश डाला।


