Delhi Election Result: जीत की ओर बढ़ती AAP, कुछ ऐसा है सरकारों का सफर

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के आज नतीजे घोषित होंगे। वहीं ईवीएम में कैद प्रत्याशियों की किस्मत का आज फैसला हो…

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के आज नतीजे घोषित होंगे। वहीं ईवीएम में कैद प्रत्याशियों की किस्मत का आज फैसला हो जाएगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों की बात करें तो एक बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है।  70 विधानसभा सीटों के लिए 8 फरवरी को 62.59% वोट डाले गए थे। दिल्ली में अभी आप की सरकार है। भाजपा 22 साल और कांग्रेस 7 साल से सत्ता से दूर है। वहीं रुझान को देख AAP दफ्तर में जश्न शुरू हो गया है।

भाजपा लोकसभा चुनावों में बेहतर
चुनाव विश्लेषक शशि शंकर सिंह के मुताबिक, दिल्ली में पहला चुनाव 1993 में हुआ। तब भाजपा को 42.80 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 2015 तक वो कभी यह आंकड़ा नहीं छू सकी। यानी फिर दिल्ली में भाजपा सरकार नहीं बनी। दरअसल, पुराने नतीजों को देखें तो यह साफ नजर आता है कि 40 या उससे ज्यादा प्रतिशत वोट हासिल करने वाले दल की ही यहां सरकार बनी। भाजपा यहां लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करती है। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दिल्ली में 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे।

1993 : पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 49 सीटें जीतीं थीं
1993 के पहले दिल्ली भी चंडीगढ़ की तरह केंद्र शासित प्रदेश था। यहां विधानसभा नहीं थी। पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 49 सीटें जीतीं। 42.80% वोट मिले। कांग्रेस को 34.50% और इसके बाद जनता दल को 12.60% मत प्राप्त हुए। मदनलाल खुराना पहले मुख्यमंत्री बने। 26 फरवरी 1996 को उन्हें हटना पड़ा। उनकी जगह साहिब सिंह वर्मा आए। चुनाव के पहले उन्हें भी जाना पड़ा। 12 अक्टूबर 1998 को सुषमा स्वराज सीएम बनीं। हालांकि, भाजपा को इसी साल हुए चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

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शीला दीक्षित लगातार तीन बार जीतीं
1998, 2003 और 2008 में कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव जीता। तीनों बार जीत का सेहरा शीला दीक्षित के सिर बंधा। हर बार वो ही मुख्यमंत्री बनीं। चांदनी चौक से कांग्रेस प्रत्याशी अलका लांबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में माना कि इस चुनाव में भी कांग्रेस शीला के काम पर ही वोट मांग रही हैं। 2013 में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से 49 दिन की सरकार चलाई। हालांकि, तब भाजपा 31 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन, बहुमत से वो पांच सीट पीछे रह गई। उसने सरकार बनाने का दावा भी पेश नहीं किया था। 2015 में ‘आप’ ने इतिहास रचा। 70 में से 67 सीटें जीतीं। केजरीवाल मुख्यमंत्री बने।

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