ऑनलाइन डेस्क लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा के हज़ारों गाँवों में रहने वाले लाखों ग्रामीणों की एक बहुत पुरानी मांग पूरी होने जा रही है. प्रदेश की मनोहर सरकार ने गाँवों से लाल डोरा को ख़त्म करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. मुख्यमंत्री ने रविवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर करनाल जिला के गांव सिरसी को लाल डोरा से मुक्त करके ग्रामीणो को उनकी प्रॉपर्टी की टाईटल डीड वितरित की. फिलहाल इस योजना के तहत प्रदेश के हर जिले से 5-5 गांव का सर्वे कर उन्हें लाल डोरा से मुक्त किया जाएगा।
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जानिए क्या होता है लाल डोरा
लाल डोरा सिस्टम को अंग्रेजों ने सन 1908 में बनाया था | उस समय रेवेन्यू रिकॉर्ड रखने के लिए खेतीबाड़ी की जमीन के साथ गाँव की आबादी को अलग-अलग दिखाने के मकसद से नक़्शे पर आबादी के बाहर लाल लाइन खिंच दी जाती थी. चूँकि इस जमीन के कागज़ तो होते नहीं इसलिए लाल डोरे के अंदर जमीन या घर पर जिसका कब्ज़ा वही उसका मालिक होता है. लाल डोरे से बाहर की जमीन के अलग अलग नंबर होते हैं और वह किसी न किसी के नाम रजिस्टर्ड भी होती है।
कैसे ख़त्म हुआ लाल डोरा
करीब दो वर्ष पूर्व भाजपा नेता राजीव जैन ने गांवों का लाल डोरा खत्म करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। उनके पत्र को आधार बनाकर मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की सब कमेटी बनाई। सब कमिटी के सामने हालांकि यह प्रस्ताव भी आया कि लाल डोरे का दायरा बढ़ा दिया जाये। कई बैठकों और विचार विमर्श के बाद हरियाणा के पूर्व राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और पूर्व शहरी निकाय मंत्री कविता जैन की सदस्यता वाली कैबिनेट की सब कमेटी ने सरकार को गांवों का लाल डोरा खत्म करने की शिफारिश की थी और जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाले मंत्री समूह में जब यह प्रस्ताव आया था तो पूरी सरकार इससे सहमत थी. जिसके बाद कैबिनेट ने गांवों की तमाम जमीनें लाल डोरे के दायरे से बाहर निकालने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी.

