फाजिल्का के गांव पक्का चिश्ती के रहने वाले किसान कश्मीर सिंह, जिसने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए बैंको और आढ़तियों से करीब 30 लाख़ रुपए का कर्ज लिया था लेकिन कर्ज ना उतार पाने के कारण उसने कीटनाशक दवा पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
जिस देश की धरती सोना उगलने के लिए मशहूर थी, आज उस देश के धरतीपुत्र मर रहे हैं। जिस देश की धरती हीरा मोती उगलती थी आज वहां धरती पुत्र जहर खा रहे हैं, फंदों पर झूलकर अपनी जिंदगी खुद लील रहे हैं। आखिर इस देश को क्या हो गया। पंजाब, जहां रोजाना किसान अपनी जिंदगी गवां रहे हैं। कारण सिर्फ कातिल कर्ज है। सरकार ऐलान करने बाद भी कर्जमाफ नहीं कर रही। और किसानों कर्ज कम नहीं हो रहा। एक और किसान। कश्मीर सिंह, जिला फाजिल्का, गांव पक्का चिश्ती। कर्ज 30 लाख।
कश्मीर सिंह किसान जो सुबह अपने खेतों में पानी लगाने के लिए गया लेकिन वहां पर जाकर उसने कीटनाशक दवा पी ली जिसको उसके परिवार वालों ने फाजिल्का के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया लेकिन वहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। कर्जे से परेशान किसान द्वारा आत्महत्या किये जाने पर फाजिल्का सदर पुलिस ने लाश को अपने कब्जे में लेकर फाजिल्का सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया ।
कश्मीर सिंह जिस कीटनाशक का इस्तेमाल कर अपनी फसलों को बचाता था उसी कीटनाशक को निगलकर अपनी जान दे दी। 30 लाख का भारी भरकम कर्ज जिसे चुकाना 60 साल के बुजुर्ग किसान के लिए शायद असंभव सा था। उम्मीद थी की सरकार जल्द माफ करेगी लेकिन सरकार के आये चार महीने बीत गए कर्ज माफ नहीं हुआ।
कश्मीर सिंह के उपर 15 लाख बैंक का कर्ज था, 10 से 15 लाख के करीब साहूकार का कर्ज, पत्नी का कैंसर का इलाज और दो-दो बेटियों की शादी, फसल उतनी हुई नहीं कि बेचकर पैसे चुका देता। ब्याज बढ़ता गया और किसान कश्मीर सिंह तिल तिल मरता रहा, आखिरकार उसने जीवनलीला समाप्त कर ली और इस तरह एक और धरतीपुत्र कातिल कर्ज के बोझ तले दब गया। क्योंकि ना तो अब इस देश की धरती सोना उगलती है और ना ही हीरे मोती सा मोल मिलता है।
