देश का अन्नदाता कहे जाने वाला पंजाब का किसान आज कर्ज के बोझ तले दब कर आत्महत्या करने पर मजबूर है पिछले 4 महीनों में करीब 150 किसान आत्महत्या कर चुके हैं और यह संख्या यहीं पर नहीं रुकी है बलिक हर रोज एक से 2 किसान इस कर्ज के बोझ तले दब कर अपनी जीवन लीला को समाप्त कर रहा है।
चंडीगढ़ (पंजाब) : पंजाब कांग्रेस की बात करें या फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह की बात करें चुनाव के समय में इनके द्वारा किसानों के साथ कर्ज माफी को लेकर बहुत से वादे किए गए थे। कहा गया था कि कर्ज के बोझ तले दबे किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा कैप्टन अमरिंदर सिंह तो अपनी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कुछ किसानों की विधवाओं को भी मंच पर बुलाकर उनसे वादा करते नजर आए थे। इसके अलावा पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने किसानों के घर-घर जाकर उनके लोन माफी से संबंधित कांग्रेस के द्वारा बनाए फार्मों पर भी हस्ताक्षर करवाये थे। लेकिन जब सरकार बनी तो उसके तीन महीनों के बाद किसानों का करीब 1500 करोड़ रुपए का कर्ज माफ करने का ऐलान किया गया।
लेकिन यह कर्ज़ भी कैसे माफ किया जाएगा इसका तरीका क्या होगा और सलीका क्या होगा। इसको लेकर 2 दिन पहले पंजाब के वित्त मंत्री सहित एक प्रतिनिधि मंडल मुंबई में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड बैंक के अधिकारियों से मिला जहां इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया। क्योंकि 17 अगस्त को कैप्टन अमरिंदर सिंह के द्वारा किसानों के कर्ज माफी को लेकर गठित टी हक कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी तो सरकार इस रिपोर्ट पर किस तरह से अमलीजामा पहनाएगी इसी पर मंथन का दौर इन दिनों पंजाब में चल रहा है।
अपनी मीटिंग को लेकर मनप्रीत बादल का कहना था कि 1500 करोड़ के कर्ज माफी की घोषणा की गई है उसका तरीका क्या होगा सलीका क्या बनेगा और यह पैसा कैसे किसान के अकाउंट में जाएगा और सरकार की क्रेडिट लिमिट क्या रहेगी एवं किसानों के कर्ज ना देने के चलते बैंकों के द्वारा अकाउंट बंद ना किए जाएं। इस तमाम मुद्दे पर पंजाब के प्रतिनिधिमंडल ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड बैंक के साथ मीटिंग की है। साथ ही दोनों बैंकों से यह भी आग्रह किया है कि वह किसानों से संबंधित लोन डाटा पंजाब सरकार को उपलब्ध करवाने का प्रयास करें जिसके आधार पर पंजाब सरकार किसानों का कर्ज माफ कर सके।
वही मनप्रीत सिंह बादल का कहना था कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को भुनाने में लगा हुआ है। पंजाब सरकार किसानों का कर्ज माफ करने के बाद ही विधानसभा सत्र बुलाएगी। आपको बता दें कि शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने सत्ता पक्ष से मांग की है कि वह किसानों के मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाए।
