करगिल विजय दिवस पर सैनिकों के बलिदान को सम्मान

दिल्ली : ये गाथा है अमर सेनानियों की, जिन्होंने अपनी खून की आखिरी बूंद तक ना सिर्फ इस देश की रक्षा की, बल्कि देश की जमीन…

दिल्ली : ये गाथा है अमर सेनानियों की, जिन्होंने अपनी खून की आखिरी बूंद तक ना सिर्फ इस देश की रक्षा की, बल्कि देश की जमीन पर कुंडली जमाए दुश्मनों को खदेड़ने में जरा भी देरी नहीं की। ना जाने दुश्मनों ने कितनी गोलियां चलाई, कितने गोले दागे, लेकिन भारत माता के वीर सपूत बिना किसी डर के बेफिक्र आगे बढ़ते गए और आखिर में दुश्मनों को देश की जमीन से भगा ही दिया। आज हम करगिल विजय दिवस मना रहे हैं। करगिल में घुसे पाकिस्तान सेना के जवानों और आतंकवादियों से लड़े गए युद्द में जीत का दिन है आज। और आज का दिन एक संकल्प भी है कि देश की सिर किसी कीमत पर झुकने नहीं देंगे। साल 1999 में जम्मू-कश्मीर के करगिल जिले में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ जो युद्ध था, उसके लिए भारतीय सेना तैयार नहीं थी। भारतीय सरकार और सेना को पता नहीं था कि दुश्मन गहरी साजिश कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लाहौर यात्रा के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ हमारी सेना करगिल की चोटियों पर बर्फबारी से बचने के लिए बेसकैंप में आ रही थी।

दो महीने तक चली पाकिस्तान से लड़ाई

बस यहीं बड़ी चूक हो गई और दुश्मनों ने चोटियों पर कब्जा जमा लिया। मंशा थी करगिल के सहारे जम्मू और कश्मीर को जीतने की। जैसे ही भारतीय सेना को दुश्मनों की मौजूदगी का पता चला, मोर्चा संभाल लिया गया। सीधी खड़ी चोटियों से गोलाबारी करते दुश्मनों की परवाह किए बिना 8 मई को अभियान शुरू कर दिया। 12 से 13 जून 1999 को पाकिस्तानी घुसपैठियों से टोलोलिंग की पहाड़ी मुक्त कराई गई। यह चोटी इतनी महत्वपूर्ण थी कि भारतीय सेना की सप्लाई लाइन बाधित हो गई थी। वहीं NH 1 पर भी खतरा उत्पन्न हो गया था। लेकिन एक बार भारतीय सेना ने टोलोलिंग पर जीत हासिल किया तो दुश्मनों का हारना पक्का हो गया। एक-एक करके भारतीय सेना चोटियों पर जीत हासिल करती चली गई और आखिर में दुश्मनों को भगा दिया गया। करीब दो माह तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना को 26 जुलाई 1999 को जीत हासिल कर लिया। इस जीत के बाद हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित करते रक्षा मंत्री अरूण जेटली।
शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित करते रक्षा मंत्री अरूण जेटली।

प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने किया नमन

करगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके भारतीय सेना के प्रति सम्मान प्रकट किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें देश के जवानों पर गर्व है। हमारे जवानों ने देश की रक्षा और गर्व की लड़ाई लड़ी। करगिल दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री अरूण जेटली और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने इंडिया गेट पर युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही सैनिकों की देश की रक्षा में दिए गए बलिदान को याद किया। साथ ही इसका भी संकल्प लिया कि देश की सुरक्षा में हरसंभव योगदान देंगे। आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच लड़े गए करगिल युद्ध में कई अनूठे रिकॉर्ड भी बने हैं। युद्ध में तोपखाने से ढाई लाख गोले और रॉकेट भी दागे गए थे। 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोजाना करीब पांच हजार बम बरसाए थे। अमूमन लड़ाई के दौरान हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था। करीब दो महीन तक चले युद्ध में भारतीय सेना ने दुश्मनों को भारत की जमीन से भगाकर जीत हासिल की।

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