बारिश में ‘जलमग्न’ निगम प्रशासन के दावे!

यमुनानगर : मानसून के दस्तक ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं सड़कों, गली-मोहल्लों में जमा बारिश का पानी फजीहत का कारण बन गया…

यमुनानगर : मानसून के दस्तक ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं सड़कों, गली-मोहल्लों में जमा बारिश का पानी फजीहत का कारण बन गया है। यह हुआ है नगर निगम के सोये रहने के कारण। यमुनानगर पानी-पानी है और निगम है कि अलर्ट के बाद भी गंभीर नहीं हुआ। जहां तक आपकी नजर जाएगी, सिर्फ पानी ही पानी देखने को मिलेगा। और यकीन मानिए, ये किसी तालाब का नजारा नहीं है या ना ही पानी पर घर तैर रहे हैं। ये नजारा है यमुनानगर का। जहां यमुनानगर जगाधरी नगर निगम के दावे मानसून की पहली बरसात में ही बहता हुआ दिखाई दे रहा है।

तीन दिन पहले ही भारी बारिश के अलर्ट के बाद भी निगम प्रशासन कुछ नहीं कर पाया। और दो दिनों से जारी बारिश के चलते लोग घरों में कैद रहने को विवश हो गए हैं। नेशनल हाईवे से लेकर शहर की सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। कहीं नाले ओवरफ्लो हैं तो कहीं घरों में पानी घुस गया है। वहीं आम जनता का सवाल है कि अभी ये हाल है तो आने वाले दिनों में क्या होगा। शहर जलमग्न है और अधिकारियों की बातें सुनकर आप समझ नहीं पाएंगे कि आखिर वो कहना क्या चाह रहे हैं।

मानसून आने के पूर्व यमुनानगर जगाधरी नगर निगम के कमिश्नर गिरीश अरोड़ा ने कहा था कि पूरी तैयारी कर ली गई है और कहीं भी जलभराव की स्थिति नहीं होगी। नालों की सफाई करा दी गई है। नालों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है। लेकिन वर्तमान हालात देखकर लगता है कि कागजों में ही नालियों को साफ करवाया गया है। आपको बता दें कि पिछले साल भी बारिश के कारण विकट स्थिति पैदा हो गई थी। लेकिन इसके बावजूद निगम प्रशासन नहीं सचेत हुआ। हालांकि इस साल भी दावे तो बड़े-बड़े किए गए लेकिन तीन दिनों की बारिश में ही निगम के दावे जलमग्न हो गए हैं।

 

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