आज केमिकल का जहरीला धुआं हमारे वातावरण की सेहत को मौत की कगार तक लेकर जा रहा है। विषय की गंभीरता है कि आज अंतराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदूषण को लेकर बड़े बड़े सम्मेलन हो रहे हैं । ओजोन परत को बचाने के लिए बड़े समझोतों पर सहमति बन रही है। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है तो इसका के वातावरण और मनुष्य की सेहत को सुधारने का रास्ता भी कृषि से ही निकलना चाहिए ऐसा ही कुछ भगीरथी प्रयास कृषि विभाग की ओर से किया जा रहा है, जिसमें बाओ गैस प्लांट लगाने के लिए गांव-गांव जाकर कृषि अधिकारी किसानों को जागरूक कर रहे है। ये उनकी मेहनत का नतीजा है कि किसान इसमें रूचि भी ले रहे हैं। हर साल एक एडीओ के क्षेत्र में पांच से सात बायोगैस प्लांट की औसत बढ़ोतरी हो रही है। फतेहाबाद की ये तस्वीर है।

क्या है बायोगैस ?
बायो गैस जिसे आम बोलचाल में गोबर गैस प्लांट भी कहा जाता है छोटी सी जगह में ढक कर बनाया जाता है दो से तीन पशुओं के गोबर से एक औसत परिवार इसे अपने यहां लगा सकता है। इसमें किसी भी तरह का बायो वेस्ट डाला जा सकता है जिसके बाद इससे गैस निकलती है जो एक पाईप के माध्यम से सीधे रसोई में लेकर जाई जाती है।
बायो गैस के फायदे।
यह गैस हर्बल है। इसे जहरीला नहीं माना जाता, इससे प्रदूषण नहीं फैलता। वहीं इससे जो वेस्ट निकलता है वो खेतों के लिए अनमोल खाद है जिसके उपयोग करने से कैमिकल खाद से भी छुटकारा मिल जाता है। इससे वातावरण, कृषि भूमि, फसल मनुष्य और पशु सभी की सेहत में सुधार हो रहा है। वही कैंसर जैसी घातक बिमारी से भी यह तकनीकी बचाव करती है।
क्या कहते है उपभोक्ता ?
हमारे पास दो साल से लगा हुआ है एक तो इसमें गोबर का इस्तेमाल सही ढंग से हो जाता है। भैंस का सारा वेस्टेज इसमें इस्तेमाल हो जाता है। अच्छी तरह से चलता है एक बार गोबर मिलाने के बाद दो-तीन घण्टे तक आसानी से चल जाता है। इसमें दूसरे सिलेण्डरों की कोई जरूरत नहीं पड़ती इससे जो गोबर निकलता है उसे खेतों में खाद के रूप में बेहतर ढंग से प्रयोग कर रहे हैं। बहुत ही अच्छा चल रहा है धुए से हमारा पीछा छूटा हुआ है। सारा कुछ ओ.के. है।
किसानों को हो रहा फायदा।
किसान मनप्रीत सिंह ने बताया कि हमने ये गोबर गैस प्लांट चार साल से लगा रखा है हमने कभी भी दूसरा कोई सिलेण्डर इस्तेमाल नहीं किया। हम इसमें रोटी पानी दाल सब्जी सारा कुछ इससे ही बनाते है। हमारे पास घर में तीन सिलेण्डर रखे हैं लेकिन हमने इसका इस्तेमाल ही नहीं किया।
गृहणी को पसंद है बायोगैस तकनीक
गृहणी ने बताया कि यह बिल्कुल ठीक चल रहा है, बहुत ही अच्छा है धुआं बिल्कुल भी नहीं होता, यह बहुत ही अच्छी तकनीक है। यह गोबर गैस प्लांट बेहद अच्छा चल रहा है सरकार ने यह स्कीम बेहद अच्छी चला रखी है।
प्रशासन की नजर में।
एसडीओ बलजीत सिंह ने बताया कि इससे एक तो किसानो को गैस मिल रही है इससे उसका रसोई का खर्चा काफी घट जाता है। एलपीजी गैस के मुकाबले में यह गैस बेहद अच्छी है इसका कोई साईड इफैक्ट नहीं है। बाओ गैस वेस्टेज जो निकलता है यह खेत के लिए बेहद अनमोल चीज है। आमतौर पर किसान केमिकल फर्टीलाइजर का इस्तेमाल करता जा रहा है इसी वजह से हमारी बिमारियों का प्रकोप बढता जा रहा है कैंसर जैसी घातक बिमारियां फैल रही है। समाज में अगर देसी चीजों को अपनाया जाए तो किसानों खेतों की सेहत भी सुधरेगी और आदमियों की भी। ये तो फैक्ट है कि अगर जमीन स्वस्थ होगी तो पशु भी स्वस्थ होंगे, पशु से जो दूध मिलेगा वो स्वस्थ होगा। और अगर जो हम फसल ले रहे है उसमें सारे न्यूट्रीयल है तो आदमी की सेहत जरूर सुधरेगी। बिमारियों से बचाव होगा।
सरकार दे रही सब्सिडी।
एडीओ सुरेश कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में 20से 25 गोबर गैस प्लांट लग चुके है किसानों के प्रति इसका अच्छा रूझान है किसानों को इसमें ज्यादा कीमत लगाने की जरूरत नहीं है इसमें 30-35 हजार खर्चा आ जाता है। सामान्य किसान को इस पर 9 हजार रूपए छूट और अनुसूचित जाति को 11 की छूट सरकार की ओर से दी जा रही है। किसान इसके प्रति रूचि ले रहे है।











