जलालाबाद: करोड़ों का गेहूं हुआ खराब और अब उस खराब गेहूं की रखवाली पर खर्चे जा रहे हैं लाखों रुपए जी हां हम बात कर रहे हैं जलालाबाद के ब्राह्मणी वाला रोड पर बने गोदामों में गले सड़े अनाज की लगभग 75,000 बोरियों की जिसमें कीड़े लग चुके हैं।

दरअसल साल 2013 में सरकारी खरीद एजेंसी PUNSP की तरफ से जलालाबाद के बामणी वाला रोड पर किराए के गोदामों में अनाज मंडियों से खरीद कर गेहूं की 2 लाख 50 हजार बोरी रखी गई थी जिसके रखरखाव का जिम्मा PUNSUP के इंस्पेक्टरों और चौकीदारों पर था लेकिन कुछ ही देर बाद वहां पर पड़ा अनाज खराब होने लगा जिसकी 75,000 बोरियां आज भी गली-सड़ी हालत में यहां पर पड़ी है। ये गेहूं इस कदर खराब हो चुका है कि इसे इंसान तो क्या जानवर भी नहीं खा सकते और इस खराब अनाज की वजह से यहां भारी बदबू आती है वही साथ में बीमारियां फैलने का डर भी बना हुआ है।

इस खराब पड़े गेहूं की रखरखाव में एजेंसी द्वारा लाखों रुपए हर महीने खर्चे जा रहे हैं यहां पर एजेंसी के 2 इंस्पेक्टर और 4 चौकीदार ड्यूटी पर तैनात हैं जिनको विभाग के द्वारा लाखों रुपए तनख्वाह के रूप में हर साल दिया जाता है वहीं दूसरी तरफ गोदाम एजेंसी का ना होकर किराए का है जिस का किराया लाखों रुपए के तौर पर हर साल एजेंसी द्वारा अदा किया जा रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि अगर यह अनाज यहां पर खराब हो चुका है और किसी काम का नहीं है तो फिर इसके रखरखाव पर हर साल लाखों रुपए क्यों खर्च किए जा रहे हैं और इस अनाज को खराब करने के पीछे क्या वजह रही इसकी जांच विभाग के द्वारा कब तक पूरी कर ली जाएगी या फिर सरकार को इसी तरह हर साल लाखों रुपए का चूना लगता रहेगा ?
इस सब के बाद जब हमने इसी विभाग के इंस्पेक्टर जर्मन सिंह से बात की तो उन्होंने दबी जुबान में खराब हुई इस गेहूं के बारे में जानकारी दी और उस समय जो इंस्पेक्टर ड्यूटी पर तैनात थे और जिनके रहते यह गेहूं खराब हुआ उनके नाम भी बताएं।

इस पूरे मामले में आम जनता का कहना है कि सरकार इस तरफ विशेष ध्यान दें क्योंकि जितना किराया और जितने लागत का गेहूं खराब हुआ है उससे कम पैसों में तो सरकार जमीन खरीदकर गोदाम तैयार कर सकती है और कुदरत की इस बेशकीमती सौगात अनाज को बचाया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि लिविंग द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर सरकार कितनी जल्दी गंभीर होती है और जिस वजह से करोड़ों का अनाज खराब हुआ वह वजह कितनी जल्दी आम जनता के सामने आती है।
