पानीपत, 22 अक्टूबर
पानीपत में बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। निजी कंपनी को दिए गए पैरलल लाइसेंस को रद्द करने और बिजली व्यवस्था के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की इस नीति का वे लगातार विरोध करते रहेंगे और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बिजली कर्मियों का सरकार को अल्टीमेटम
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज वास्तव में बिजली कर्मचारियों के साथ हैं तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए या फिर कर्मचारियों के धरने पर आकर उनके साथ बैठना चाहिए। कर्मचारियों ने साफ कहा कि निजीकरण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बिजली व्यवस्था निजी हाथों में देने का विरोध
बिजली कर्मचारियों का आरोप है कि बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं, दोनों के हित में नहीं है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों के अधिकारों की नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था को निजीकरण से बचाने की लड़ाई भी है। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है।
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