दिल्ली, 16 अक्टूबर
आज शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और भय से मुक्ति मिलती है।
कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है। माता सिंह पर सवार रहती है औऱ उनकी चार भुजाएं है। मां कात्यायनी के दाहिने हाथों अभय मुद्रा और वर मुद्रा में है। मां कात्यायनी के बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल है। मां कात्यायनी अधर्म का नाश करती है और अपने भक्तों की रक्षा करती है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौंकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना करें। माता को फूल, रोली, अक्षत धूप, दीप अर्पित करें। मां को पीले रंग के वस्त्र और मिठाई का भोग लगाएं। मां कात्यायनी से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
मां कात्यायनी का शक्तिशाली मंत्र
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।
कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
मान्यता है कि मां के इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है औऱ मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



