दिल्ली, 14 अक्टूबर
आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडाकी पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और सकारात्मक उर्जा का आशीर्वाद मिलता है। मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान के साथ इस दुनिया की रचना की थी। इसलिए मां कूष्मांडा को आदिशक्ति और आदिस्वरूप भी कहा जाता है। मां कूष्मांडा की पूजा के लिए हरा रंग बेहद शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन हरे रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं।
कैसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप ?
मां का यह स्वरूप तेजस्वी और दिव्य है। मां की आठ भुजाएं हैं इसलिए मां को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है।मां के हाथों में धनुष, कमंडल, बाण, कमल का फूल, चक्र और अमृत से भरा कलश व गदा सुशोभित है। मां के आठवें हाथ में जपमाला रहती है। मां कूष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
भक्त सुबह स्नान कर मां कुष्मंडा के स्वरूप की स्थापना करें। माता को सबसे पहले फूल अर्पित करें और मां से परिवार की सुख-समृद्धि केलिए प्रार्थना करें। मां को अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। इसके बाद मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।अंत में माता को उनका पसंदीदा मालपुआ को भोग लगाएं।
मां कूष्मांडा का मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
मां के इस मंत्र का जाप करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।



