भिवानी , 7 सितंबर
भिवानी में पंडित नेकीराम शर्मा की 139वीं जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस पार्टी और किसान सभा के कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न वर्गों के लोग पहुंचे। कार्यक्रम में पंडित नेकीराम शर्मा की आदमकद प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
इस दौरान उनके जीवन और संघर्ष को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा ने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ किसान और मजदूरों के अधिकारों के लिए भी लंबा संघर्ष किया।उन्होंने क्षेत्र के लोगों में राजनीतिक और सामाजिक चेतना पैदा करने का काम किया और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने की प्रेरणा दी।
पंडित नेकीराम शर्मा का नाम हरियाणा के स्वतंत्रता आंदोलन के उन योद्धाओं में लिया जाता है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपना पूरा जीवन संघर्ष में लगा दिया।उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह, व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।आजादी के आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें अंग्रेजों की जेलों में यातनाएं भी सहनी पड़ीं।
पंडित नेकीराम शर्मा ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ किसानों को संगठित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उन्हें संगठित होकर अन्याय का मुकाबला करने का रास्ता दिखाया।हांसी के स्कीनर बंधुओं और लोहारू रियासत के नवाब के खिलाफ किसानों को संगठित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।
पंडित नेकीराम शर्मा किसान नेता ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी उन्होंने मजबूती से आवाज उठाई।उन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, जातिवाद, छुआछूत और बेगार जैसी कुरीतियों का विरोध किया।वहीं विधवा विवाह और महिलाओं के बराबरी के अधिकार का समर्थन करते हुए उन्होंने समाज में बदलाव की मुहिम को आगे बढ़ाया।उनके विचारों में आजादी का मतलब केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं था, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को सम्मान, समानता और अधिकार मिलना भी था।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा की विरासत आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।वक्ताओं ने किसान और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता जताई।उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं, जिनका सीधा असर किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है।साथ ही कॉरपोरेट ताकतों के बढ़ते प्रभाव और धर्म तथा जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशों पर भी सवाल उठाए गए।
उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अंबेडकर और शहीद भगत सिंह के सपनों का हवाला देते हुए शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और खुशहाल किसान-मजदूर की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
अन्य खबरें जानें
भिवानी में Gen Z अभिलाषा राज्य स्तरीय एकल गायन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, 60 गायकों ने दिखाया दम



