‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत मानसिक स्वास्थ्य का इलाज करवाने वालों में 75% लाभार्थी 18-45 आयु वर्ग से संबंधित, कामकाजी आबादी के लिए समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान

चंडीगढ़; 17 अगस्त : गंभीर स्वास्थ्य समस्या केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार पर भारी भावनात्मक और…

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चंडीगढ़; 17 अगस्त : गंभीर स्वास्थ्य समस्या केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार पर भारी भावनात्मक और वित्तीय बोझ भी डाल सकती है। जब बीमारी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित हो तो सामाजिक दबाव, जागरूकता की कमी और इलाज की लागत संबंधी चिंताएं अतिरिक्त बाधाएं पैदा कर सकती हैं, जिसके कारण अक्सर पेशेवर मदद लेने में देरी हो जाती है।

पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (एमएमएसवाई) मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कवर किए गए इलाज को वित्तीय रूप से सुलभ बनाकर इस चुनौती का महत्वपूर्ण ढंग से सामना करने में मदद कर रही है। पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के 11 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात महीनों के दौरान 709 लाभार्थियों ने योजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य का इलाज करवाया, जिस पर 83.36 लाख रुपये का खर्च आया।

आयु वर्ग के आंकड़े विशेष तौर पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाते हैं। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत कैशलेस इलाज प्राप्त करने वाले 284 लाभार्थी 31-45 आयु वर्ग के थे, जबकि 249 लाभार्थी 18-30 आयु वर्ग से संबंधित थे। इन दोनों आयु वर्गों को मिलाकर कुल 533 लाभार्थी बनते हैं, जो कुल लाभार्थियों का 75.2 प्रतिशत हैं।

इस संबंध में स्वास्थ्य और परिवार भलाई मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी सुविधा नहीं बननी चाहिए, जिसके लिए परिवार केवल तभी पहुंच करे जब वह खर्च उठाने में सक्षम हो। अगर किसी व्यक्ति को पेशेवर मदद की जरूरत है तो उस व्यक्ति को सही समय पर सही इलाज मुहैया करवाना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत न्यूरोटिक और तनाव से संबंधित विकारों, मूड और भावनात्मक विकारों, मानसिक और शारीरिक कारकों से संबंधित व्यवहारिक सिंड्रोम और नशीले पदार्थों के उपयोग के कारण होने वाले मानसिक और व्यवहारिक विकारों सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जा रहा है। इलाज का यह तरीका आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ-साथ नशाखोरी से संबंधित समस्याओं से निपटने की जरूरत को भी उजागर करता है।

सिविल अस्पताल बरनाला की कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. गगनदीप सेखों, एम.डी. (मनोचिकित्सा), ने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य के नजरिए से 18-45 आयु वर्ग विशेष तौर पर अहम है क्योंकि यह वह चरण होता है जब लोग अपना करियर बना रहे होते हैं, रिश्तों को संभाल रहे होते हैं, परिवार पाल रहे होते हैं और महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियां निभा रहे होते हैं।”

डॉ. गगनदीप सेखों ने आगे कहा, “मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को अक्सर तब तक नजरअंदाज किया जाता है, जब तक वे रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू नहीं कर देतीं, लेकिन तब तक उनका इलाज करना बहुत मुश्किल हो जाता है।”

एसएचए के आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य और नशे के उपयोग के बीच घनिष्ठ संबंध को भी उजागर करते हैं, जिसके कारण पंजाब की ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम राज्य की व्यापक मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए विशेष तौर पर उपयुक्त बन जाती है। नशे पर निर्भरता के मनोवैज्ञानिक, व्यवहारिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं और इसके लिए लगातार पेशेवर इलाज, नशा मुक्ति सेवाओं और पुनर्वास की जरूरत पड़ सकती है। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के आंकड़ों में नशीले पदार्थों (साइकोएक्टिव) के उपयोग के कारण पड़ने वाले विकार और स्वभाव संबंधी विकार भी शामिल हैं, जो नौजवानों के लिए शुरुआती जागरूकता, समय पर हस्तक्षेप और सुलभ इलाज प्रणाली के महत्व को दर्शाते हैं।

इसके साथ ही, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली इलाज को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

स्वास्थ्य और परिवार भलाई मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पंजाब के हर परिवार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें हमारे नौजवानों के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य कवर और मानसिक स्वास्थ्य इलाज को भी इसमें शामिल किए जाने से यह योजना मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए लोगों के सामने आने वाली वित्तीय झिझक को दूर करने में सहायक हो रही है। इसके साथ ही, ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम रोकथाम, नशा मुक्ति सेवाओं और पुनर्वास को मजबूत करती है, जबकि ‘सीएम की योगशाला’ सुलभ स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देती है।”

‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ और ‘सीएम दी योगशाला’ मिलकर पंजाब की मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली के पूरक पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से लेकर नशा मुक्ति सेवाओं, पुनर्वास और पेशेवर इलाज शामिल है। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के उपलब्ध आंकड़ों में चार में से तीन से अधिक लाभार्थी 18-45 आयु वर्ग से संबंधित हैं। ऐसे में समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना पंजाब की कामकाजी उम्र की आबादी के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और तंदुरुस्ती की रक्षा के लिए विशेष तौर पर महत्वपूर्ण है।

 

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