शिमला, 2 अगस्त
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस‘ के तहत कई अहम फैसले किए हैं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि अब उद्योगों के लिए पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) वन-टाइम आधार पर जारी किए जाएंगे और यदि संबंधित विभाग 30 दिनों के भीतर मंजूरी नहीं देते हैं तो उसे ऑटोमैटिक अप्रूवल माना जाएगा।
हर्ष वर्धन चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर उद्योग विभाग की प्रस्तुति के बाद यह निर्णय लिया गया है। पहले विभिन्न विभागों से NOC लेने में काफी समय लगता था, जिससे उद्योगों को परेशानी होती थी। अब सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से मंजूरी देने के निर्देश दिए गए हैं। अब NOC की वैधता उद्योग की आवश्यकता के अनुसार तीन या पांच वर्ष की होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी खनन परियोजना की योजना पांच वर्ष के लिए स्वीकृत है तो उससे संबंधित प्रदूषण नियंत्रण NOC भी पांच वर्ष के लिए ही जारी की जाएगी। इससे उद्योगों को हर वर्ष नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
NOC के नवीनीकरण में देरी होने के कारण किसी भी संचालित उद्योग को बंद नहीं किया जाएगा। पहले ऐसी स्थिति में उद्योगों का संचालन प्रभावित होता था, जिससे सरकार के राजस्व, उद्योगों और कर्मचारियों सभी को नुकसान उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होगा।
उद्योग मंत्री हिमाचल प्रदेश इसके अलावा हर्ष वर्धन चौहान ने बताया कि राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में भी संशोधन किए हैं। अब 10 से कम कर्मचारियों वाले छोटे प्रतिष्ठानों को श्रम विभाग में पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी और ‘इंस्पेक्टर राज‘ पर अंकुश लगेगा।
सरकार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को निवेश के लिए अधिक अनुकूल बनाना है। इन फैसलों से उद्योग व खनन क्षेत्र को लाभ मिलेगा और राज्य में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
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