पद्म भूषण तरलोचन सिंह प्रथम डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित

चंडीगढ़, 27 जुलाई : पंजाबी, हिंदी और गुरमत साहित्य के महान विद्वान पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी की 100वीं जयंती के अवसर पर पंजाब कला…

On the occasion of the 100th birth anniversary of Padma Shri Dr. Rattan Singh Jaggi, a great scholar of Punjabi

चंडीगढ़, 27 जुलाई : पंजाबी, हिंदी और गुरमत साहित्य के महान विद्वान पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी की 100वीं जयंती के अवसर पर पंजाब कला परिषद द्वारा आज पंजाब कला भवन में डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल फाउंडेशन के सहयोग से एक स्मृति समारोह आयोजित किया गया।

इस अवसर पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष पद्म भूषण स.तरलोचन सिंह को प्रथम डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया। सम्मान के अंतर्गत उन्हें 51,000 रूपये की नकद राशि, शॉल तथा स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।

समारोह के दौरान स्पीकर संधवां ने पंजाब कला भवन परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर तथा उनकी प्रतिमा का भी लोकार्पण किया।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि आज हम एक ऐसे कर्मयोगी का स्मरण कर रहे हैं, जो वास्तविक अर्थों में युगपुरुष थे। उन्होंने कहा कि डॉ. जग्गी की रचनाओं ने समाज को जोड़ने का कार्य किया और उनकी साहित्यिक विरासत आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है कि आज सरदार तरलोचन सिंह जैसे व्यक्तित्व को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने संसद में सत्य की आवाज़ बनकर सिखों और पंजाबियों का प्रभावशाली नेतृत्व किया। स्पीकर ने जग्गी परिवार द्वारा फाउंडेशन के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी भाषा, साहित्य और कला के माध्यम से ही जीवित रहता है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद पद्म भूषण तरलोचन सिंह ने पंजाब कला परिषद और डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. जग्गी के साहित्यिक योगदान तथा उनके हस्तलिखित शोध कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के इस युग में भी उनके द्वारा किए गए कार्यों की कल्पना करना कठिन है। उन्होंने कहा कि डॉ. जग्गी आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रकाश-स्तंभ बने रहेंगे।

उन्होंने सम्मान स्वरूप प्राप्त 51,000 रूपये की राशि फाउंडेशन को वापस समर्पित करते हुए आग्रह किया कि इस धन से डॉ. जग्गी की पुस्तकें युवाओं को निःशुल्क वितरित की जाएँ।

पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सवी ने परिषद की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. रतन सिंह जग्गी स्मृति पुरस्कार प्रत्येक वर्ष 27 जुलाई को प्रदान किया जाएगा और इसकी शुरुआत आज से की गई है। उन्होंने डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल फाउंडेशन का विशेष धन्यवाद करते हुए बताया कि फाउंडेशन ने लगभग 20 लाख रूपये व्यय कर कला भवन के ओपन एयर थिएटर का कायाकल्प कराया है।

डॉ. अमरजीत सिंह ने ‘पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति को डॉ. रतन सिंह जग्गी का योगदान’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि डॉ. जग्गी ने छह दशकों से अधिक समय तक पूर्ण समर्पण और निष्ठा के साथ मध्यकालीन साहित्य का गहन अध्ययन एवं शोध किया। वे अंग्रेज़ी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू, फ़ारसी और संस्कृत भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने पुस्तकों, टीकाओं और विश्वकोशीय ग्रंथों के माध्यम से साहित्य जगत को अत्यंत समृद्ध और ज्ञानवर्धक योगदान दिया।

पंजाब कला परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. योगराज ने तरलोचन सिंह का सम्मान-पत्र पढ़ते हुए उनके जीवन और सेवाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तरलोचन सिंह अल्पसंख्यकों, धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने पंजाब सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग सहित अनेक महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएँ दीं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर भारत के राष्ट्रपति सचिवालय तक अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष, अध्यक्ष तथा राज्यसभा सदस्य भी रहे। भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने खेलों के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके उत्कृष्ट सार्वजनिक जीवन और सेवाओं के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2021 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

समारोह के अंत में डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल फाउंडेशन के चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मालविंदर सिंह जग्गी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, चंडीगढ़ के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शब्द-गायन से हुआ।

इस अवसर पर विधायक गुरदित्त सिंह सेखों, डॉ. रतन सिंह जग्गी की धर्मपत्नी डॉ. गुरशरण कौर जग्गी, अमरजीत सिंह ग्रेवाल, राजस्व विभाग के सचिव मनवेश सिंह सिद्धू, भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह ज़फ़र, गुलज़ार सिंह संधू, डॉ. दीपक मनमोहन सिंह, पद्मश्री प्राण सभरवाल, पद्मश्री जगजीत सिंह दरदी सहित साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं।

 

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